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आजकल प्रेस कान्फ्रेंस करना फ़ैशन बन गया है : सुप्रिया सोले

पुने, २३ अक्टूबर (एजैंसीज़) शरद पवार (Nationalist Congress Party (NCP) chief) की दुख़तर ( बेटी) और लोक सभा एम पी सुप्रिया सोले ने साबिक़ पुलिस आफीसर से समाजी कारकुन ( कार्यकर्ता) बन जाने वाले योगेश प्रताप सिंह के इस दावे को मुस्तर्द कर दिया जिस में मिस्टर सिंह

पुने, २३ अक्टूबर (एजैंसीज़) शरद पवार (Nationalist Congress Party (NCP) chief) की दुख़तर ( बेटी) और लोक सभा एम पी सुप्रिया सोले ने साबिक़ पुलिस आफीसर से समाजी कारकुन ( कार्यकर्ता) बन जाने वाले योगेश प्रताप सिंह के इस दावे को मुस्तर्द कर दिया जिस में मिस्टर सिंह ने पूने की पुरफ़िज़ा-ए-मुक़ाम लवासा की मुतनाज़ा ( विवादित) टाउन शिप की तामीर में हुए मेगा अस्क़ाम ( घोटाला) में सुप्रिया को मुबय्यना तौर पर मुलव्वस बताया था।

उन्होंने कहा था कि 25000 एकड़ पर मुहीत (व्यापक/ फैली हुई) आराज़ीयात ( जमीन) में 3000 करोड़ रुपय का अस्क़ाम ( घोटाला) हुआ है। मिस्टर सिंह ने ये इल्ज़ाम भी आइद किया कि हुकूमत महाराष्ट्रा इस तफ़रीह गाही ( घूमने फिरने वाली) टाउन शिप की मुआमलत में फ़राख़दिली का मुज़ाहरा इसलिए कर रही हैं क्योंकि जो कंपनी इस प्रोजेक्ट के पसेपुश्त ( पीछे पीछे) है, इस में शरद पवार की दुख़तर सुप्रिया सोले और उन के शौहर सदानंद सोले के 20 फ़ीसद हिसस ( हिस्से) हैं।

प्रिय सोले ने इस मुआमलत में किसी भी बेक़ाइदगी (नियम विरुद्व) से इनकार किया है। इनका कहना है कि इन के ख़िलाफ़ जो इल्ज़ामात आइद किए गए हैं, वो क़तई बेबुनियाद हैं। उन्होंने इंतिहाई सख़्त लहजा अपनाते हुए कहा कि आख़िर उन्हें और उन के अरकान ख़ानदान को निशाना क्यों बनाया जा रहा है जो भी इल्ज़ामात आइद किए हैं, वो मन घड़त हैं।

अगर मीडीया उस की तफ़सीलात जानना चाहती है तो वो उन के पास जाए और तफ़सीलात मालूम करे। हमेशा निशाना बनाए जाने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही है। मज़कूरा (उक़्त) ) कंपनी लवासा कारपोरेशन में सुप्रिया और उन के शौहर के मुबय्यना ( कथित) तौर पर 10-10 फ़ीसद हिसस हैं और एक्सिस बैंक ने इस की मालियत 100 बिलीयन रुपये लगाई है जिस से ज़ाहिर हो जाता है कि हिसस ( हिस्से) का फ़ीसद क्या होगा, क्या उसे हम रक़ूमात ( राशी) की गै़रक़ानूनी मुंतक़ली नहीं कहेंगे? सुप्रिया सोले ने बदउनवानीयों ( भ्रष्टाचार) के ख़िलाफ़ तहरीक ( आंदोलन) चलाने वालों वाई पी सिंह और अरविंद केजरीवाल को भी तन्क़ीद ( समीक्षा) का निशाना बनाते हुए कहा कि इनके (सुप्रिया) पास करने के लिए दीगर ( दूसरे) ज़रूरी काम बहुत हैं।

वो उन लोगों (केजरीवाल वग़ैरा) की तन्क़ीद पर कोई ध्यान देना नहीं चाहतीं। इन लोगों के पास लोगों पर इल्ज़ामात लगाए जाने के सिवा-ए-कोई और काम नहीं है, और बात बात पर प्रेस कान्फ्रेंस तलब करना का भी फ़ैशन बन गया है। मैं एक एम पी हूँ और अवाम ने मुझे मुंतख़ब ( चयन) किया है लिहाज़ा मेरे पास उस वक़्त अवामी मुफ़ाद ( फायदे) के काम करने के लिए भी वक़्त कम पड़ रहा है।

ऐसी सूरत में इल्ज़ामात को नजरअंदाज़ कर देना ही बेहतर है।

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