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आज़मीने हज्ज की 18 मार्च को क़ुरआ अंदाज़ी

रियासत तेलंगाना-ओ-आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज्ज बराए 2015 के इंतेख़ाब के लिए 18 मार्च को क़ुरआ अंदाज़ी मुक़र्रर की गई है। प्रोफेसर एसए शकूर स्पेशल ऑफीसर तेलंगाना स्टेट हज कमेटी ने बताया कि मर्कज़ी हज कमेटी ने जो एक्शण प्लान तर्तीब दिया ह

रियासत तेलंगाना-ओ-आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज्ज बराए 2015 के इंतेख़ाब के लिए 18 मार्च को क़ुरआ अंदाज़ी मुक़र्रर की गई है। प्रोफेसर एसए शकूर स्पेशल ऑफीसर तेलंगाना स्टेट हज कमेटी ने बताया कि मर्कज़ी हज कमेटी ने जो एक्शण प्लान तर्तीब दिया है उसे वज़ारत-ए-ख़ारजा की मंज़ूरी मिल चुकी है जिस के मुताबिक़ हज दरख़ास्तों की वसूली का मरहला मुकम्मिल होचुका है और अब आज़मीने हज्ज के इंतेख़ाब के लिए क़ुरआ अंदाज़ी 18 मार्च को मुक़र्रर है।

उन्होंने बताया कि इस साल रियासत तेलंगाना से रिकार्ड तादाद में दरख़ास्तें वसूल हुई हैं जिन की डाटा एंट्री का काम आख़िरी मराहिल में है। कोटा 2001 की मर्दुमशुमारी की बुनियाद पर अलॉट किया जा रहा है। यहां ये बात काबिल-ए-ज़िकर हैके 70 साल या ज़ाइद उम्र के दरख़ास्त गुज़ारों और मुसलसिल चौथी मर्तबा दरख़ास्त देने वालों का क़ुरआ अंदाज़ी के बगै़र रास्त इंतेख़ाब अमल में आरहा है।

इन आज़मीन की तादाद मिनहा करने के बाद जो नशिस्तें बाक़ी रह जाती हैं इन ही के लिए ज़िला वारी असास पर क़ुरआ अंदाज़ी होगी। मर्कज़ी हज कमेटी ने रियासती हज कमेटी को हिदायत दी हैके वो 2 मार्च तक वसूल शूदा दरख़ास्तों की डाटा एंट्री और उसकी तन्क़ीह-ओ-एडीटिंग का काम मुकम्मिल करलीं और 10 मार्च तमाम तफ़सीलात रवाना करदें।

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