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आज़मीन-ए-हज्ज अल्लाह की इबादत , रसूल पाक की इताअत

हैदराबाद । 21 । अक्टूबर : ( प्रैस नोट ) : मौलाना शाह मुहम्मद जमाल अलरहमन मिफताही अमीर इमारत मिल्लत-ए-इस्लामीया ने आज़मीन-ए-हज्ज को मश्वरा दिया कि वो हज के दौरान फ़ुज़ूल गुफ़्तगु करने के बजाय इबादत करते रहें वो अपने बुज़ुर्ग साथी आज़मीन-ए-

हैदराबाद । 21 । अक्टूबर : ( प्रैस नोट ) : मौलाना शाह मुहम्मद जमाल अलरहमन मिफताही अमीर इमारत मिल्लत-ए-इस्लामीया ने आज़मीन-ए-हज्ज को मश्वरा दिया कि वो हज के दौरान फ़ुज़ूल गुफ़्तगु करने के बजाय इबादत करते रहें वो अपने बुज़ुर्ग साथी आज़मीन-ए-हज्ज की ख़िदमत कर के उन की दुआएं भी हासिल करें । उन्हें तीन काम ही करने हैं अल्लाह की इबादत रसूल की इताअत और ख़लक़-ए-ख़ुदा की ख़िदमत इस तरह का अमल करने से अल्लाह के पास इन का हज क़बूल होजाएगा । वो आज अलहरा-ए-टूर्स ऐंड ट्रावैलस के ज़ेर-ए-एहतिमाम आज़मीन-ए-हज्ज की सहूलत-ओ-तर्बीयत के लिए मुनाक़िद हज समीनार से ख़िताब कररहे थे । शाह फंक्शन हाल लक्कड़ी का पल में मुनाक़िदा इस समीनार में उन्हों ने आज़मीन-ए-हज्ज के एक कसीर इजतिमा को हज के पाँच दिनों के आमाल और मनासिक हज की तफ़सीलात से आगाह किया । उन्हों ने कहा कि आज़मीन-ए-हज्ज को जाने से क़बल अहकाम हज-ओ-उमरा-ओ-आदाब ज़यारत रोज़ा अतहर के मौज़ू पर तहरीर करदा किताबों का मुताला करें । उन्हों ने कहा कि 8 ज़ी अलहजाता 12 ज़ी अलहजा आज़मीन के लिए बहुत अहम होते हैं इस दौरान बकसरत इबादत का एहतिमाम करना चाहीए । उन्हों ने कहा कि मक्का मुकर्रमा में क़ियाम के दौरान कसरत से काअबा का तवाफ़ करने की अदा अल्लाह ताली को बहुत पसंद आती है । उन्हों ने आज़मीन-ए-हज्ज को मज़ीद मश्वरा दिया कि वो करानी आयतों और तलबीहात का तलफ़्फ़ुज़ अच्छी तरह अदा करें । उन्हों ने कहा कि आज़मीन-ए-हज्ज को चाहीए कि वो अल्लाह ताली से अपने लिए अपने रिश्तेदारों , दोस्त अहबाब , रियासत , मलिक और सारी दुनिया के मुस्लमानों को राह हिदायत देने इन में इत्तिहाद पैदा करने की दुआ करें । मौलाना मुहम्मद आमिर ख़ां क़ासिमी ने आज़मीन-ए-हज्ज को तलक़ीन की कि इख़लास के साथ अल्लाह के नाम और कलिमा तुय्यबा का ज़िक्र करते रहें । अल्लाह ताली इस के बदले में उन्हें जन्नत अता करता है । मौलाना मज़हर क़ासिमी ने कहा कि कसरत से दरूद शरीफ़ का वरद करने से हम को हुज़ूर से मुहब्बत पैदा होती है इस लिए हम को हमेशा दरूद शरीफ़ का नज़राना रसूल पाक की बारगाह में पेश करना चाहीए । उन्हों ने आज़मीन-ए-हज्ज को मदीना तुय्यबा की हाज़िरी और इस के आदाब से वाक़िफ़ करवाया । उन्हों ने कहा कि ये बड़े अदब-ओ-एहतिराम का मुक़ाम है कि दिल की गहिराईयों से रसूल की ख़िदमत में दरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश करें । हुज़ूर ख़ुद सलाम का जवाब इनायत फ़रमाते हैं । इस मौक़ा पर मुहम्मद शरीफ़ अहमद मज़ाहरी क़ासिमी और दीगर उल्मा ने भी ख़िताब किया और अमली तौर पर एहराम बांधने का तरीक़ा सिखाया गया । समीनार का आग़ाज़ क़ारी मुहम्मद नज़ीर उल-हक़ फ़रीद की क़िरात कलाम पाक से हुआ । डाक्टर तुय्यब पाशाह कादरी और बीबी अम्मारा अंजुम ने हदया नाअत पेश की । जनाब मुहम्मद अख़तर हुसैन मालिक अलहरा-ए-टूर्स ऐंड ट्रावैलस ने आज़मीन-ए-हज्ज और मेहमानों का इस्तिक़बाल किया और शुक्रिया अदा किया ।

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