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आज़मीन-ए-हज्ज की तादाद में कटौती की इत्तेला पर उलझन

हैदराबाद 22 जून: हरमैन शरीफ़ैन में तोसेवी कामों के बाइस हुकूमत सऊदी अरब ने हिन्दुस्तानी हुकूमत से ख़ाहिश की हैके हज 2013 के आज़मीन की तादाद में 20 फ़ीसद तक कमी की जाये।

हैदराबाद 22 जून: हरमैन शरीफ़ैन में तोसेवी कामों के बाइस हुकूमत सऊदी अरब ने हिन्दुस्तानी हुकूमत से ख़ाहिश की हैके हज 2013 के आज़मीन की तादाद में 20 फ़ीसद तक कमी की जाये।

आज़मीन की तादाद में कमी की इत्तेलाआत के साथ ही आंध्र प्रदेश के आज़मीन-ए-हज्ज में भी तशवीश पैदा होगई है और वो रियास्ती हज कमेटी के दफ़्तर पहुंच कर अपने सफ़र हज के बारे में तसदीक़ हासिल कररहे हैं।

बताया जाता हैके मर्कज़ी हुकूमत सऊदी अरब की ख़ाहिश के मुताबिक़ इस मर्तबा हज कमेटी के ज़रीये जाने वाले आज़मीन की तादाद में तो कोई कमी करने का इरादा नहीं रखती ताहम ख़ानगी आपरेटर्स के कोटे में मुम्किन हैके बड़े पैमाने पर कटौती की जाये।

हज कमेटी ने मुल्क भर में अपने आज़मीन का क़ुरआ अंदाज़ी के ज़रीये इंतेख़ाब भी मुकम्मिल करलिया है और आज़मीन-ए-हज्ज रवानगी के अख़राजात के सिलसिले में पहली क़िस्त भी अदा करचुके हैं।

बताया जाता हैके मर्कज़ी हज कमेटी एन अहम उमूर का जायज़ा ले रही है।इसी दौरान एग्जीक्यूटिव ऑफीसर रियास्ती हज कमेटी एम ए हमीद ने बताया कि कोटे में कमी के बारे में मर्कज़ी हज कमेटी की तरफ से तहरीरी तौर पर कोई अहकामात वसूल नहीं हुए हैं और सिर्फ़ अख़बारात के ज़रीये इस तरह की ख़बरें सामने आई हैं।

उन्होंने बताया कि रियास्ती हज कमेटी के लिए हज 2013 के सिलसिले में 7322 आज़मीन का कोटा मुक़र्रर किया गया था और हज कमेटी ने क़ुरआ अंदाज़ी के ज़रीये आज़मीन का इंतेख़ाब करलिया है इस के अलावा इज़ाफ़ी कोटे के तहत वेटिंग लिस्ट के 250 आज़मीन का भी चुनाव किया गया।

वेटिंग लिस्ट के आज़मीन का चुनाव उस वक़्त हुआ जबकि सऊदी हुकूमत की तरफ से आज़मीन के तादाद में कमी की दरख़ास्त नहीं आई थी।

एम ए हमीद ने उम्मीद ज़ाहिर की के रियास्ती हज कमेटी की तरफ से चुने गए आज़मीन के सफ़र हज को कोई ख़तरा लाहक़ नहीं होगा ताहम इस बात का अंदेशा हैके दुसरे रियास्तों से बच जाने वाले आज़मीन के कोटे से आंध्र प्रदेश या किसी और रियासत को हिस्सेदारी नहीं दी जाएगी।

इस बात का भी इमकान हैके जो आज़मीन मुख़्तलिफ़ वजूहात की सबब अपना सफ़र मंसूख़ करलींगे उनकी जगह नए आज़मीन का इंतेख़ाब नहीं किया जाएगा।

हर साल रियास्ती हज कमेटी के तहत तक़रीबन 70 ता 80 अफ़राद लम्हा आख़िर में सफ़र हज मंसूख़ करलेते हैं। उन्होंने बताया कि चुने शूदा आज़मीन के लिए कोई मसाइल पैदा नहीं होंगे जिन्हों ने रक़ूमात की पहली क़िस्त अदा करदी है।

उन्होंने बताया कि हिर्म में कामों के सिलसिले में क़रीबी इमारतों के सबब रिहायश का मसला पैदा होगया है लिहाज़ा ग्रीन ज़मुरा के हाजियों को अज़ीज़ ये ज़मुरा में मुंतक़िल किया जा सकता है।

इस तरह के ज़ुमरे की तबदीली वाले आज़मीन की तादाद के बारे में मर्कज़ी हज कमेटी क़तई फ़ैसला करेगी जिस से रियास्ती हज कमेटी को वाक़िफ़ किराया जाएगा।

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