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आज़मीन-ए-हज्ज तलबीह की गूंज में वादी मिना की सिम्त रवां

मक्का मुकर्रमा 22 सितंबर:सरे आलम से लाखों मुसलमानों 1.5 लाख से ज़ाइद हिन्दुस्तानी आज़मीन ने वादी मिना की सिम्त अपना सफ़र शुरू कर दिया है और इस के साथ ही मनासिक हज का आग़ाज़ अमल हो जाएगीगा।

लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक की गूंज में आज़मीन के क़ाफ़िले ख़ेमों के शहर वादी मिना की सिम्त बढ़ने लगे और यहां से फ़रीज़ा-ए-हज की अदायगी का अमलन आग़ाज़ हो जाएगीगा। सफ़ैद एहराम में मलबूस आज़मीन मिना में इबादात-ओ-अज़कार में शब गुज़ारेंगे और चहारशंबे को तुलू-ए-आफ़्ताब के साथ ही उनकी मैदान अर्फ़ात की सिम्त रवानगी अमल में आएगी।

मक्का मुकर्रमा में मौजूद तमाम आज़मीन की रवानगी के लिए हुकूमत सऊदी अरब की तरफ से ग़ैरमामूली इंतेज़ामात किए गए हैं।

आज़मीन-ए-हज्ज मिना पहुंचने के बाद नमाज़ और दुआओं में मसरूफ़ होंगे। ख़ादिम हरमैन शरीफ़ैन शाह सलमान बिन अबदुलअज़ीज़ ने तमाम मुताल्लिक़ा एजेंसीयों को ख़ास तौर पर हिदायात जारी की हैके आज़मीन को हर तरह की सहूलत पहुंचाई जाये।

उन्होंने इस बात को यक़ीनी बनाने पर-ज़ोर दिया कि तमाम मह्कमाजात बाहमी तआवुन और रब्त के ज़रीये अल्लाह के मेहमानों की बेहतर से बेहतर ख़िदमात अंजाम दें।

सरकारी आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ इतवार तक 1.5 मिलियन आज़मीन मक्का मुकर्रमा में जमा हुए हैं। दुनिया-भर से जहां आज़मीन की आमद का सिलसिला जारी था वहीं पड़ोसी ममालिक से भी लम्हा आख़िर तक आज़मीन यहां पहूँचते रहे। तक़रीबन 1.5 लाख हिन्दुस्तानी आज़मीन जारीया साल फ़रीज़ा-ए-हज की सआदत हासिल कर रहे हैं।

सऊदी हुक्काम ने हिफ़ाज़ती पहलूओं को बेहतर बनाए रखने के मक़सद से तक़रीबन एक लाख सिक्युरटी अरकान अमला को मुतय्यन किया है। वज़ारत-ए-दाख़िला ने जो सिक्युरटी उमोर की ज़िम्मेदार है मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में तक़रीबन 5,000 सी सीटी वी कैमरे नसब किए हैं। 24 घंटे ख़ुसूसी कंट्रोल रुम के ज़रीये हालात पर नज़र रखी जा रही है।

हज इस्लाम का पांचवां फ़रीज़ा है और 8 ज़ीलहजा को तलूअ फ़ज्र के बाद मनासिक हज का बाक़ायदा आग़ाज़ होजाता है चुनांचे आज़मीन वादी मिना से मैदाने अर्फ़ात की तरफ़ रवाना होजाते हैं और यहां ख़ुसूसी दुआओं-ओ-अज़कार का एहतेमाम किया जाता है क्युंकि वक़ूफ़ अर्फ़ात ही हज का अहम रुकन है।

मैदान अर्फ़ात में ज़ुहर और अस्र की नमाज़ की अदायगी के बाद हुज्जाज किराम मग़रिब की नमाज़ अदा किए बग़ैर ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब के फ़ौरी बाद मुज़दल्फ़ा के लिए रवाना होजाते हैं और यहां रात-भर क़ियाम अमल में आता है।

हुज्जाज किराम मुज़दल्फ़ा में अल्लाह की किबरियाई बयान करते और इबादात-ओ-अज़कार में मसरूफ़ रहते हैं। यहां मग़रिब और इशा की नमाज़ की अदायगी अमल में आती है।

दूसरे दिन यानी 10 ज़ीलहजा को तुलू-ए-आफ़्ताब से पहले रुमी जुमरात के लिए हुज्जाज किराम मिना की सिम्त निकल पड़ते हैं और यहां सिर्फ बड़े शैतान को सात कंकरीयां मारी जाती हैं ये अमल भी पूरा होने के बाद हुज्जाज किराम क़ुर्बानी देते हैं और अपने बाल कटवाकर एहराम की पाबंदी से आज़ाद होजाते हैं । उस के बाद तवाफ़ ज़यारत की जाती है।

इस के बाद हुज्जाज किराम अपने ख़ेमों में वाक़्ये वादी मिना वापिस होते हैं और रात इबादात-ओ-अज़कार में गुज़ारने के बाद दूसरे दिन यानी 11 ज़ीलहजा को रुमी जुमरात के लिए रवाना होते हैं। 12 ज़ीलहजा को भी यही अमल दोहराया जाता है और इस के बाद ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब से पहले वादी मिना से तमाम हाजी निकल जाते हैं।

ताहम बाज़ हुज्जाज किराम 13 ज़ीलहजा को भी वादी मिना में क़ियाम करते हुए रुमी जुमरात करते हैं जो अफ़ज़ल है। इस तरह अल्लाह के मेहमानों का ये मुबारक फ़रीज़ा पूरा होता है।

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