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आज के दिन हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर, आठ साल बाद भी सवालों के घेरे में !

दिल्ली पुलिस पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी मुठभेड़ की है और उसमें बेक़सूर लोगों को मार गिराया है. इस सवाल पर दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी खुलकर कुछ नहीं बोले.इस मामले के कई पहलू सवालों का विषय बने रहे
दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में 19 सितंबर, 2008 को एक मुठभेड़ के दौरान दो संदिग्ध आतंकवादी और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद्र शर्मा की मौत हो गई थी. मारे गए संदिग्धों की पहचान आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद के रूप में हुई थी. बाद में दो संदिग्ध बाटला हाउस इलाके से गिरफ़्तार भी किए गए थे. इस मामले को लेकर पांच ऐसे सवाल हैं, जो लगातार उठते रहे.
2008 में केंद्र की सत्ता कांग्रेस के पास थी. यानी दिल्ली पुलिस भी कांग्रेस सरकार के अधीन थी. मगर पार्टी के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने उस वक्त कहा था कि उन्होंने खुद मारे गए दो युवकों के फोटोग्राफ देखे हैं, जिसमें एक लड़के के सिर में गोली लगी है. आमतौर पर मुठभेड़ के दौरान सिर में गोली नहीं लगती. मुठभेड़ में सामने से गोली चलेगी तो पेट या सीने में लगेगी न कि सिर पर.
दिल्ली पुलिस के अधिकारी उस वक्त तर्क दे रहे थे कि अगर उनकी यह मुठभेड़ फर्जी थी तो उनके एक काबिल इंस्पेक्टर की मौत नहीं होती. मगर पुलिस पर सवाल उठाया गया था कि कहीं इंस्पेक्टर मोहनचंद्र शर्मा की मौत पुलिस वालों की गोली लगने से तो नहीं हुई थी. क्योंकि उनके शरीर पर जिस तरह से गोली लगी थी, उसे देखकर शक पैदा हो रहा था.
बटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने सामने आकर सफाई दी थी. उन्होंने कहा था कि ये एनकाउंटर एकदम सही था. यहां तक कि उन्होंने इस मामले को दोबारा खोलने की किसी भी संभावना से साफ इनकार कर दिया था. इस पर सवाल उठा था कि उस वक्त गृहमंत्री मामले की दोबारा जांच क्यों नहीं कराना चाहते थे.

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