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‘आतंकवाद और माओवाद के बहाने नोट बंदी से ध्यान भटकाने की कोशिश’ : रिहाई मंच

सामाजिक-राजनीतिक-धार्मिक संगठनों पर पाबन्दी लोकतंत्र की हत्या
लखनऊ : केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा डॉ जाकिर नायक के गैर सरकारी संगठन  इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर प्रतिबन्ध लगाने का लिया गया फैसला भारतीय लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए रिहाई मंच ने इसका पुरजोर विरोध किया है।
रिहाई मंच लखनऊ महासचिव शकील कुरैशी ने कहा कि मोदी सरकार हिटलर के रास्ते पर चल रही है। ये सरकार संविधान द्वारा प्रदत्त किसी धर्म को मानने व उसके प्रचार व प्रसार के अधिकार पर सीधा हमला कर रही है। इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की गतिविधियां विधि विरुद्ध हैं इस पर महाराष्ट्र सरकार व केंद्र सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही ऐसे तथ्य एकत्र किए हैं जो विधि विरुद्ध क्रिया कलाप में आते हैं। बांग्लादेश में हुए आतंकी हमले के बाद ऐजेंशियों ने जाकिर नायक का नाम एक विचारक जिसके प्रभाव में उन लोगों ने वारदात की इस रूप में सामने लाया। लेकिन जाकिर नायक के किन विचारों से उत्तेजना फैली वो विचार सामने नहीं लाया। उन्होंने कहा कि ठीक इसी तरह 2001 में अटल सरकार में बिना सबूतों के सिमी को प्रतिबंधित किया गया  जिस पर से दो बार प्रतिबन्ध न्यायालय ने भी हटाया । सिमी के बहुत से लोग केसेस से बरी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीकर से आईएसआईएस के नाम पर गिरफ्तारी या फिर नोटबंदी के फैसले को आतंकवाद और माओवाद से जोड़ा जा रहा है उससे साफ है कि जनता का ध्यान भटकाने के लिए सुरक्षा व ख़ुफ़िया एजेंसियां फर्जी गिरफ्तारियों करा सकती हैं |
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