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आतंकवाद के आरोपों में उम्रकैद की सजा पा चुके दो मुस्लिम युवक को हाईकोर्ट ने किया बरी

मुंबई। आतंकवाद के आरोपों के तहत निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पा चुके दो मुस्लिम युवकों को आज अदालत ने बरी कर दिया. उत्तर प्रदेश के लखनऊ हाई कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने जमीयत उलेमा महाराष्ट्र की ओर से दर्ज किए गये याचिका पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें उन्हें देशद्रोही गतिविधियों के आरोपों से बाइज़्ज़त बरी किए जाने का आदेश जारी किया।

कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि इन युवकों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ रखने के आरोपों के तहत निचली अदालत के फैसले पर पुनर्विचार करने के फैसले की सुनवाई बाद में होगी।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार पिछले पंद्रह वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे कैद उन युवाओं पर अगर विस्फोटक पदार्थ रखने का आरोप साबित भी हो जाता है तो वे आसानी से जेल से रिहा हो जाएंगे, क्योंकि कानून के अनुसार इस आरोप के तहत अधिकतम सजा महज दस वर्षों ही हो सकती है। उन्हें 14 जनवरी 2001 में गिरफ्तार किया गया था.

जमीयत उलेमा महाराष्ट्र कानूनी सहायता समिति के प्रमुख गुलजार आजमी ने मुंबई में यह जानकारी पत्रकारों को दी, बताया कि इन आरोपियों सलीम कमर और अल्ताफ हुसैन को 14 जनवरी 2001 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने विस्फोटक पदार्थ रखने और देशद्रोही गतिविधियों में शामिल होने के तहत गिरफ्तार किया था. उनके पास से आरडीएक्स, जिंदा कारतूस, टाइमर, बैटरी और अन्य सामग्री जब्त करने का दावा किया था जिससे वह राम जन्मभूमि अयोध्या में बम धमाका करना चाहते थे।

फैजाबाद विशेष गंगेस्टर अदालत ने अल्ताफ हुसैन और सलीम कमर को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 121,122 के तहत उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी उसी तरह विस्फोटक कानून के प्रावधानों 3,4,5 के तहत दस साल की सजा का प्रस्ताव था। गुलजार आजमी ने कहा कि निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ लखनऊ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी जिसकी सुनवाई पिछले दो वर्षों से जारी थी जिस पर आज सुनवाई प्रक्रिया में आई.

सुनवाई के दौरान दो सदस्यीय बेंच के जस्टिस एस चौहान और न्यायमूर्ति अनंत कुमार ने आरोपियों को एक ओर जहां उम्रकैद की सजा से बरी कर दिया वहीं विस्फोटक वाले कानून के तहत दस साल की सजा वाले मामले की सुनवाई भी स्थगित कर दी।

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