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आत्महत्या करने वाले 80 फीसदी किसानों ने बैंकों से कर्ज लिया था, महाजनों से नहीं: एनसीआरबी

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने किसानों के आत्महत्याओं को लेकर चौकाने वाला आकड़ा पेश किया है। एनसीआरबी ने साल 2015 के आकड़े पेश किए है जिसमें बताया गया है जिस किसानों ने कर्ज न चुका पाने के कारण खुदकुशी की उनमें से 80 फीसद  ने महाजनों से कर्ज न लेकर बैंकों से कर्ज लिया था।

एनसीआरबी के मुताबिक, जिन 3,000 किसानों ने 2015 में आत्महत्या की थी उनमें से 2,474 ने बैंकों या किसी माइक्रो फाइनैन्स कंपनी से कर्ज लिया था। वहीं दूसरी तरफ इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2015 के मुकाबले इस किसानों की आत्महत्या तीन गुणा इजाफा हुआ था।  एनसीआरबी  ने जो आकड़ा पेश किया है उसमें बताया है कि 2014 में जहां 1,163 किसानों ने आत्महत्या की थी वहीं 2015 में 3,097 किसानों ने आत्महत्या की। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2014 में जहां फसल के बर्बाद होने की वजह से 969 किसानों ने आत्महत्या की, वहीं 2015 में यह 1,562 तक पहुंच गया।

एनसीआरबी के डेटा के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्या किया। महाराष्ट्र में 1,293 किसानों ने आत्महत्या की, वहीं कर्नाटक में 946 और तेलांगना में 632 किसानों ने आत्महत्या की। रिपोर्ट में बताया गया है कि आत्महत्या करने वाले इन ज्यादातर किसानों पर बैंकों का कर्ज था।  वहीं मात्र तेलांगना में 131 और कर्नाटक में 113 किसानों ने सूदखोर महाजन से कर्ज लिया था।

 

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