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आदिवासी युवक को नक्सली होने के आरोप में छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया एनकाउंटर

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की बस्तर पुलिस पर फिर एक बार फिर एक आदिवासी युवक की फर्जी मुठभेड़ में हत्या करने का आरोप लगा है। गुस्साए ग्रामीणों ने युवक का शव लेकर मर्दापाल थाने का घेराव किया। आक्रोशित भीड़ देख पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। रात 12 बजे तक थाने के सामने ग्रामीण जुटे रहे। मौके पर पहुंचे कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम ने पुलिस से शव वापस दिलाया, जिसे लेकर आधी रात ग्रामीण वापस लौटे। ग्रामीण अभी भी गुस्से में हैं और गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में युवक को मारा है

ग्रामीण का आरोप है कि पुलिस ने युवक को घर से उठाया और जंगल में ले जाकर मार दिया। वहीं पुलिस का कहना है कि मारा गया युवक नक्सली था और उसे मुठभेड़ में मारा गया है।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोंडागांव जिले के मर्दापाल थानाक्षेत्र के छोटे कोड़ेर गांव का बाल सिंह शोरी पिता रामधर इसी साल जुलाई के महीने में नक्सल आरोप से कोर्ट से बरी हुआ था। इसके बाद वह अपनी पत्नी तथा ढाई साल व आठ महीने के दो बच्चों के साथ गांव में रह रहा था। मृतक की पत्नी चचाड़ी का आरोप है कि बालसिंह को 24 नवंबर की रात 9 बजे घर से पुलिस ने उठाया था। 26-27 नवंबर की बांसगांव के जंगल में उसकी हत्या कर दी गई। गांव वालो का कहना है कि उसे तीन महीने पहले कोर्ट ने बरी किया था और पुलिस नक्सली बता रही है। पुलिस आदिवासियों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या करने में लगी है।

पुलिस का क्या कहना है इस मामले पर

हालांकि पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ के दौरान एक वर्दीधारी नक्सली की मौत हुई है। उसका शव भी बरामद किया गया है। 27 नवंबर को मृतक के परिजन कोंडागांव मुख्यालय पहुंचे और बालसिंह का शव लेकर गांव लौट गए। इसके बाद अचानक ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया और सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर मर्दापाल थाने का घेराव कर दिया। मृतक बालसिंह को इसी साल अप्रैल में पुलिस ने नक्सल मामले में गिरफ्तार किया था। जुलाई में कोर्ट ने उसी बरी कर दिया था।

जन प्रतिनिधि भी पुलिस की कार्यशैली पर उठा रहे सवाल

कोंडागांव के विधायक मोहन मरकाम का कहना है कि बालसिंह को पुलिस घर से उठाकर ले गई थी। ग्रामीण पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की जा रही। मामले को लेकर समाज और जनप्रतिनिधियों में भारी रोष है।

 

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