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आमिर खान बनाएंगे ‘महाभारत’ पर एक फिल्म, निभाएंगे कर्ण की भूमिका

मुंबई : बॉलिवुड के मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट आमिर खान पिछले काफी समय से ‘महाभारत’ की कहानी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। ‘महाभारत को लेकर आमिर की बातचीत और रिसर्च को सुनकर ऐसा लगता है कि आमिर ने अब ‘महाभारत’ बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। आमिर ने एक चर्चा के दौरान बताया कि वह काफी समय से ‘महाभारत’ पर एक फिल्म बनाना चाहते हैं। ‘महाभारत’ के बंगाली वर्जन से बेहद प्रभावित आमिर कहते हैं कि वह ‘महाभारत’ में कुंती पुत्र कर्ण की भूमिका निभाना चाहते है।

‘महाभारत’ को लेकर हुई एक चर्चा में आमिर ने कहा, ‘मैं ‘महाभारत’ पर फिल्म बनाना चाहता हूं। यह बात मैं काफी समय से सोच रहा हूं। ‘महाभारत’ बहुत बड़ा प्रॉजेक्ट होगा… एक बार अगर मैंने इसे बनाना शुरू किया तो 15 साल लग जाएंगे। पांच साल तो सिर्फ इसके रिसर्च और कहानी लिखने में लग जाएंगे और उसके बाद इसकी शूटिंग भी बहुत बड़े बजट की होगी। ‘महाभारत’ जब बनेगी तो इस तरह की जो भी ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग’ जैसी हॉलिवुड फिल्म हैं उन सबमें बड़ी होगी। दुनिया की सबसे महान फिल्म होगी।’

आमिर ‘महाभारत’ में कर्ण की भूमिका निभाने को लेकर बेहद उत्साहित होते हुए कहते हैं, ‘मैं ‘महाभारत’ में कर्ण की भूमिका निभाना चाहता हूं क्योंकि कर्ण का किरदार ‘महाभारत’ में सबसे महत्वपूर्ण हैं। मुझे कर्ण की पहली एंट्री भी बेहद प्रभावित करती है जब वह प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहली बार आता है और कुंती उसके कवच-कुंडल देख कर बेहोश हो जाती है, मैं कर्ण को लेकर यही दृश्य सबसे ज्यादा अपने मन सोचता और कल्पना करता हूं।’

‘महाभारत’ को बनाने के लिए आमिर ने एक पूरी प्लानिंग तैयार कर ली है, वह इसे 7 भागों में बनाने की तमन्ना रखते हैं। आमिर कहते हैं, ‘जिस तरह से मैं सोच रहा हूं उसमें 7 भाग में ‘महाभारत’ पर फिल्म बनाई जा सकती है। क्योंकि फिल्म के पहले भाग में तो सिर्फ भीष्म पितामह की कहानी होगी। भीष्म पितामह ही पहले भाग के हीरो भी होंगे। जब तक हम भीष्म पितामह को नहीं समझेंगे महाभारत को नहीं समझ सकते हैं। पहले भाग के अंत में कौरव और पांडव का जन्म होगा और उनका बचपन दिखाया जा सकेगा।’

फिल्म बनाने को लेकर निर्देशन, वक्त और पोस्ट-प्रॉडक्शन को लेकर उपरी तौर पर रिसर्च कर चुके आमिर आगे कहते हैं, ‘अगर मैं ‘महाभारत’ को प्रैक्टिकली बनाने की बात करूं तो इसे 7 भाग में बनाने के लिए 7 अलग-अलग निर्देशकों को फिल्म बनाने का जिम्मा देना होगा। अगर आप 7 अलग-अलग बार फिल्म का निर्देशन करेंगे तो आपके 21 से 22 साल लग जाएंगे और इन 22 सालों में ऐक्टर का चेहरा भी बदल जाएगा ….इसलिए फिल्म को एक साथ शूट करना पड़ेगा। कोई एक व्यक्ति क्रिएटिव हेड होगा जो सभी सात निर्देशकों को गाइड करेगा। जब सात निर्देशक 7 अलग-अलग यूनिट के साथ फिल्म की शूटिंग करेंगे तो एक से दो साल में फिल्म की सिर्फ शूटिंग पूरी होगी। बाद में पोस्ट प्रॉडक्शन का काम धीरे-धीरे पूरा करते हुए 6-6 महीने में फिल्म का एक-एक भाग रिलीज किया जा सकता है।’

‘महाभारत’ के बजट पर बात करते हुए आमिर कहते हैं, ‘महाभारत’ ऐसा विषय है जिसे एक क्लियर विजन से बनाना होगा। इस तरह की एपिक फिल्म बनाने के दौरान फिल्म का बजट नहीं देखना चाहिए। मुझे लगता है ‘महाभारत’ को हमें एक गिफ्ट की तरह बनाना चाहिए। ‘महाभारत’ के बजट की बात करें तो इसके एक पार्ट को बनाने में ही 200 से 300 करोड़ का बजट होगा।’

आमिर आगे कहते हैं, ‘भारत में अगर आप ‘महाभारत’ जैसी महान फिल्म बनाएंगे तो पैसे की कमी कभी भी नहीं होगी… क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसे हर आदमी एक दफा जरूर देखना चाहेगा और हमारे देश की जनसंख्या इतनी है कि अगर 500 मिलियन यानी 50 करोड़ लोग भी फिल्म को देखेंगे तो मान लो एक टिकट 100 रुपए का होगा तब भी 5000 करोड़ आपकी कमाई होगी। मुझे नहीं लगता है कि कोई व्यक्ति इस फिल्म को फोन या टीवी में देखने का इंतजार करेगा।’

‘महाभारत’ की कास्टिंग को लेकर आमिर का कहना है, ‘फिल्म को 3D में बनाया जाएगा। ‘महाभारत’ में कलाकारों का चुनाव देश भर से होगा खास तौर पर साउथ के ऐक्टर्स का। मुझे इमोशनली यह लगता है कि ‘महाभारत’ में इन्डियन कलाकारों की कास्टिंग हो हॉलिवुड या ग्लोबल कलाकारों की कास्टिंग से बचना चाहिए। फिल्म को इंडियन्स के साथ इंडिया के लिए बनाना चाहिए और दुनिया भर को दिखाना चाहिए। फिल्म को हिंदी, अंग्रेजी और तमिल में बनाया जाना चाहिए।’

देश भर में ‘महाभारत’ के कई वर्जन हैं लेकिन आमिर को ‘महाभारत’ का बंगाली वर्जन सबसे ज्यादा दिलचस्प लगता है। वह कहते हैं, ‘महाभारत’ के रिसर्च में हमें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इसके कई वर्जन हैं कोलकाता का अलग वर्जन है, मद्रास का अलग है और उत्तर भारत का अलग है। इनमें से बंगाली वर्जन को मैंने पढ़ा है। बहुत कमाल का है बंगाली वर्जन। क्योंकि बंगाली वर्जन द्रौपती के पॉइंट ऑफ व्यू से लिखा गया है जिसमें ‘महाभारत’ के अंत में पांडवों के पहाड़ पर चढ़ने का वर्णन बहुत बेहतरीन है। मैंने इसे तीन से चार दफा पढ़ा है।’

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