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आयकर निपटान आयोग ने माना, हमने सिर्फ सहारा इंडिया का केस ही सबसे कम समय में निपटाया

नई दिल्ली: सहारा इंडिया को आयकर निपटान आयोग (ITSC) से मिली राहत पर द इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर पर आयोग ने खुद मुहर लगाते हुए कहा है कि पिछले पांच सालों में सहारा के अलावा किसी भी केस में इतनी जल्दी सुनवाई नहीं हुई. इसके साथ ही आयोग ने यह भी टिप्पणी की है कि सहारा इंडिया के इस केस में आय कर विभाग ने जरूरी छानबीन भी नहीं की, हालांकि इसके लिए 90 दिनों का वक्त तय होता है.

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जनसत्ता के अनुसार, आयोग ने स्वीकार किया है कि सहारा इंडिया का केस पिछले पांच सालों में सबसे कम समय में निपटाए गए केसों में सबसे पहले नंबर पर है. इस फैसले के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने भी सहारा डायरी को सबूत मानने से इनकार कर दिया और जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका ठुकरा दी. आय कर विभाग ने नवंबर 2014 में सहारा इंडिया के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान एक डायरी बरामद की थी जिसमें कुछ नेताओं के नाम थे और उन्हें पैसे देने के बारे में लिखा हुआ था. आयोग ने इस डायरी को सबूत मानने से भी इनकार कर दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हें सबूत मानने से इनकार करते हुए जांच की मांग वाली पीआईएल याचिका खारिज कर दिया. हालांकि, अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि आयोग के फैसले को चुनौती देना है या नहीं यह आयकर विभाग तय करेगा.

आयोग ने सहारा इंडिया द्वारा दाखिल केस को पहले खारिज कर दिया था लेकिन 5 सितंबर, 2016 को उसे फिर से सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया. आयोग ने तीव्र कार्रवाई करते हुए मात्र तीन सुनवाई में ही अपना फैसला सुनाते हुए सहारा इंडिया को राहत दे दी. आयोग ने राहत का आदेश 10 नवंबर 2016 को सुनाया है जो आखिरी सुनवाई की तारीख 7 नवंबर 2016 से तीन दिन बाद है. वैसे सामान्यत: आयोग 18 महीनों में किसी मुद्दे पर अंतिम फैसला सुनाता है. फैसले के आखिरी पन्ने में लिखा गया है कि छापे के दौरान कंपनी से 137.58 करोड़ रुपये बरामद हुए थे जिस पर अब टैक्स आरोपित किया जाता है. आयोग ने इस टैक्स की राशि अदायगी को भी 12 किश्तों में कर दिया है.

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