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आरिज़ा गुर्दा(गुर्दे की बिमारी) के ईलाज और बहन की शादी के लिए फ़िक्रमंद

रमज़ान उल-मुबारक का महीना ना सिर्फ तक़वा-ओ-परहेज़गारी की तलक़ीन करता है बल्कि यतीमों-ओ-यसीरों और गुरबा-ए-ओ-मसाकीन और मरीज़ों की मदद की तरफ़ भी तवज्जा मबज़ूल करवाता है ताकि तक़वा-ओ-परहेज़गारी के ज़रीया माबाक़ी अय्याम में दीनी राह इ

रमज़ान उल-मुबारक का महीना ना सिर्फ तक़वा-ओ-परहेज़गारी की तलक़ीन करता है बल्कि यतीमों-ओ-यसीरों और गुरबा-ए-ओ-मसाकीन और मरीज़ों की मदद की तरफ़ भी तवज्जा मबज़ूल करवाता है ताकि तक़वा-ओ-परहेज़गारी के ज़रीया माबाक़ी अय्याम में दीनी राह इख़तियार की जा सके।

जबकि यतीम-ओ-यसीर, मरीज़-ओ-गरबा-ए-ओ- मसाकीन की मदद करते हुए उन को भी अपनी ख़ुशीयों में शामिल करना भी एक इबादत है। इस बात को लेकर एक होनहार बी काम के तालिब-ए-इल्म मुहम्मद ज़ुल्फ़क़ार अली साकिन सदी पेट ज़िला मेदक ने हमदरदान मिल्लत से अदबन दरख़ास्त की है कि वो उन की दामे, दिरमे भरपूर मदद करें क्यों कि वो गुज़श्ता चार साल से गुर्दे के आरिज़ा(बिमारी) में मुबतला हैं।

फ़िलहाल-ओ-डाईलासीस पर मुनहसिर हैं जिस का ख़र्च उन के लिए नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त होगया है। बीमारी में मुबतला परेशान हाल यतीम-ओ-यसीर मुहम्मद ज़ुल्फ़क़ार ने बताया कि इन के वालिद जनाब मुहम्मद क़ासिम अली साहिब के इंतिक़ाल के बाद उन की वालिदा मुहतरमा का साया भी एक साल क़बल उन के सर से उठ गया जिस के बाद वो और उन की छोटी हमशीरा दिनों फ़िलहाल कसमपुर्सी की ज़िंदगी गुज़ारने पर मजबूर हैं।

इन की हमशीरा जो कि ग़ैर शादीशुदा है उन की ख़िदमत में लगी हुई है। मुहम्मद ज़ुल्फ़क़ार अली उन के और उन की बहन की शादी के रुकमी अख़राजात, ईलाज मुआलिजा के ख़र्च को लेकर काफ़ी मुतफ़क्किर हैं। उन्हों ने बताया कि इन के वालदैन का कोई असासा भी नहीं है और ना कोई मुस्तक़िल आमदनी का ज़रीया है। ऐसे में गर्दों के ईलाज के लिए डाईलासीस का ख़र्च और उन की बहन की शादी का ख़र्च बर्दाश्त करना इन के लिए मुतहम्मिल नहीं है।

मुहम्मद ज़ुल्फ़क़ार अली ने बताया कि गुर्दों के मर्ज़ के बाइस वो तालीम तर्क(छोडने) करने पर मजबूर होगए हैं और वो रोज़गार के लिए मेहनत-ओ-मशक़्क़त के काबिल भी नहीं रहे। ऐसे में वो एक मजबूर व लाचारगी की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं कि कोई उन की मदद और ईलाज के लिए आगे आएगा।

उन्हों ने माह रमज़ान उल-मुबारक के मसऊद मौक़ा पर मुस्लमानों से दरख़ास्त की है कि वो अपनी ज़कात, फ़ित्रा, हदया-ओ-अतयात उन के मर्ज़ के ईलाज के इलावा उन की हमशीरा के ब्याह के लिए भरपूर तआवुन (मदद)करें जिस के लिए वो परवरदिगार के दरबार में ताहयात दुआ-करते रहेंगे।

अपने अतयात और हदया जात बनाम मुहम्मद ज़ुल्फ़क़ार अली, A/C.No.62092172200 ,BH,SIDDIPET BRANCH या फ़ोन 9177887586 , 8978607896 पर रब्त करें।

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