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आलमी सतह पर मामूल के अलादा तीसरी मुलाज़मत का रुजहान भी मक़बूल

मुंबई 27 अक्तूबर (पी टी आई) हाल ही में किए गए एक सर्वे से ये बात सामने आई है कि अब दफ़ातिर और रिहायश गाहों के दरमयान तीसरी मुलाज़मत का रुजहान भी बढ़ता जा रहा है और इस ने काफ़ी मक़बूलियत भी हासिल करली है क्योंकि इस के अपने अलहदा फ़ायदे भी हैं

मुंबई 27 अक्तूबर (पी टी आई) हाल ही में किए गए एक सर्वे से ये बात सामने आई है कि अब दफ़ातिर और रिहायश गाहों के दरमयान तीसरी मुलाज़मत का रुजहान भी बढ़ता जा रहा है और इस ने काफ़ी मक़बूलियत भी हासिल करली है क्योंकि इस के अपने अलहदा फ़ायदे भी हैं।

सर्वे में दरअसल ये मालूम करने की कोशिश की गई थी कि आख़िर तीसरी मुलाज़मत ने अपने लिए गुंजाइश क्योंकर पैदा करली? जिस के बाद ये इन्किशाफ़ हुआ कि लोग ज़्यादा तर ऐसे मुक़ामात पर मुलाज़मत को तर्जीह देते हैं जो उन की रिहायश गाहों से क़रीब वाक़्य हूँ जिससे ना सिर्फ मुलाज़मत से मुतमइन होने का एहसास और काम करने की सलाहीयत में भी इज़ाफ़ा होता है।

आलमी सतह पर तक़रीबन 17,800 अफ़राद से राबत क़ायम किया गया था जिन में हिंदूस्तान भी शामिल ही। दफ़ातिर में मामूल की मुलाज़मत अंजाम देते हुए लोग दरमयान में तीसरी मुलाज़मत केलिए भी कोशां हैं। इस सर्वे रिपोर्ट को तैय्यार करने वाले ज़ीवनाअसटरीटनद जोटाव्न प्लानर और वर्क प्लेसज़ हिक्मत-ए-अमली साज़ भी हैं ने यहां वीडीयो कान्फ़्रैंसिंग के ज़रीया लंदन से अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए कहा कि ये तीसरी मुलाज़मत दरअसल बिज़नस सैंटरस, क्लब्स, लाइब्रेरीज़ और काफ़ी शॉप्स में की जाती है।

यहां इस बात का तज़किरा दिलचस्प होगा कि हिंदूस्तान के हर शहर में भी तीसरी मुलाज़मत का वजूद किसी ना किसी सूरत में पाया जाता ही। ऐसे लोग जो किसी अख़बार के दफ़्तर में शाम की डयूटी अंजाम देते हैं वो सुबह दो या चार घंटों केलिए तीसरी मुलाज़मत भी करलेते हैं। इस के बाद घर लौट कर खाना खाकर और आरम करने के बाद मामूली की मुलाज़मत पर चढ़ जाते हैं।

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