Sunday , October 22 2017
Home / Khaas Khabar / आला पाकिस्तानी क़ाइदीन (उच्च पाकिस्तानी लीडर) को तहक़ीर ए अदालत की सज़ा से बचाव

आला पाकिस्तानी क़ाइदीन (उच्च पाकिस्तानी लीडर) को तहक़ीर ए अदालत की सज़ा से बचाव

पाकिस्तानी पार्लीमेंट के एवान-ए-ज़ेरीं (संसद) ने आज एक क़ानून की मंज़ूरी दे दी, जिस का मक़सद क़ाइदीन (लीडर) को तहक़ीर ए अदालत(अदालत की तौहीन) की सज़ा के ख़िलाफ़ तहफ़्फ़ुज़(shielding / बचाव) फ़राहम करना और सुप्रीम कोर्ट के वज़ीर-ए-आज़म पर सदर-ए-पाकिस्तान आ

पाकिस्तानी पार्लीमेंट के एवान-ए-ज़ेरीं (संसद) ने आज एक क़ानून की मंज़ूरी दे दी, जिस का मक़सद क़ाइदीन (लीडर) को तहक़ीर ए अदालत(अदालत की तौहीन) की सज़ा के ख़िलाफ़ तहफ़्फ़ुज़(shielding / बचाव) फ़राहम करना और सुप्रीम कोर्ट के वज़ीर-ए-आज़म पर सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ जालसाज़ी के मुक़द्दमात के अहया के लिए दबाओ डालने की कोशिशों को कुचलना है।

वज़ीर-ए-क़ानून पाकिस्तान फ़ारूक़ एच नायक ने ये तहक़ीर ए अदालत क़ानून 2012 पार्लीमेंट के ऐवान-ए-ज़ेरीं क़ौमी असैंबली में पेश किया। इस को बाद में मुख़्तसर मुबाहिस के बाद जिस के दौरान अहम अपोज़ीशन पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने एहतिजाज भी किया और क़ानून की मुख़ालिफ़त की, मंज़ूर कर लिया गया।

सदर आसिफ़ अली ज़रदारी ने क़ानून पेश करने के लिए ख़ुसूसी इजलास तलब किया था। ये क़ानून पाकिस्तानी सेनेट में भी पेश किया गया और तवक़्क़ो है कि बरसर-ए-इक़तिदार पाकिस्तान पीपल्ज़ पार्टी जिस को पार्लीमेंट के ऐवान-ए-बाला ( राज्य सभा) में अक्सरीयत (बहुसंख्यक/बहुमत/Majority) हासिल है, क़ानून मंज़ूर कर लेगी।

हुकूमत का इरादा इस क़ानून को पार्लीमेंट के दोनों ऐवानों में सुप्रीम कोर्ट की जानिब से सदर आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ करप्शन के मुक़द्दमात के अहया के मुक़द्दमा की समाअत ( सुनवायी) से क़बल मंज़ूर करवाना है, जो 12 जुलाई को मुक़र्रर है। तहक़ीर अदालत क़ानून गुंजाइश फ़राहम करता है कि सरकारी ओहदेदारों की आमलाना कार्यवाईयों को अदालती कार्रवाई के ख़िलाफ़ तहफ़्फ़ुज़ फ़राहम किया जाय।

ये क़ानून एक जज के ख़िलाफ़ महकमाजात की कार्रवाई के आग़ाज़ (शुरू करने) के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा इक़दाम तहक़ीर ए अदालत ( कानून का अपमान करने) के दायरा कार में लाए बगै़र किया जा सकेगा। हुकूमत ने सदर आसिफ़ अली ज़रदारी को पाकिस्तान और बैरूनी ममालिक में अदालती कार्रवाई से इस्तिस्ना (बचाव) हासिल होने की बिना पर उन के ख़िलाफ़ जालसाज़ी के मुक़द्दमात का अहया करने से इनकार कर दिया था, जिस की बिना पर साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म पाकिस्तान यूसुफ़ रज़ा गिलानी को सुप्रीम कोर्ट ने पार्लीमेंट की रुकनीयत (सदस्यता) के लिए नाअहल क़रार दिया था और उन्हें अपने वज़ीर-ए-आज़म के ओहदा से भी मुस्ताफ़ी होना पड़ा था |

TOPPOPULARRECENT