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आवारा कुत्तों को समाज के लिए खतरा बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि आवारा कुत्तों के प्रति सहानुभूति रखने के बावजूद उन्हें समाज के लिए खतरा बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। अदालत के अनुसार, इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। जस्टिस दीपक मिश्रा और यूयू ललित की खंडपीठ ने इसके साथ ही आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए पशु कल्याण बोर्ड द्वारा तैयार फ्रेमवर्क की सुनवाई का फैसला किया है।

पशु कल्याण बोर्ड की सिफारिशों के साथ बुधवार को वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम और अंजलि शर्मा अदालत में पेश हुए। बोर्ड ने अपने प्रस्ताव में कहा कि आवारा पशुओं के जन्मदर में कमी लाकर रैबीज के खतरे और लोगों को कुत्तों से होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है। बोर्ड ने सुझाव दिया कि उसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए एक केंद्रीय समन्वय समिति का गठन किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के मंत्रियों को इसका सदस्य बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा बोर्ड ने पशु जन्मदर को नियंत्रित करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर भी समन्वय समितियों के गठन का सुझाव दिया है।

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