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आसाम, यूपी फ़सादाद : मुसलमानों के ख़िलाफ़ तास्सुब ( धार्मिक पक्ष) : शाही इमाम

शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने आज नमाज़ जुमा से क़बल ख़िताब में मुसलमानों को ताकीद की कि वो रोज़ों का एहतिमाम करें। रोज़ा मुकम्मल जिस्म का होता है, आँख, कान, ज़बान, हाथ पैर सब ही को इबादत में मशग़ूल रह क

शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने आज नमाज़ जुमा से क़बल ख़िताब में मुसलमानों को ताकीद की कि वो रोज़ों का एहतिमाम करें। रोज़ा मुकम्मल जिस्म का होता है, आँख, कान, ज़बान, हाथ पैर सब ही को इबादत में मशग़ूल रह कर गुनाहों से इजतिनाब ( नफरत) करना चाहीए।

उन्होंने तरावी के एहतिमाम पर भी ज़ोर दिया। शाही इमाम ने नए सदर जमहूरीया परनब मुकर्जी की कामयाबी पर मुबारकबाद दी और उम्मीद ज़ाहिर की कि इन के दौर में सैक्यूलर अज़म को इस्तिहकाम मिलेगा और मुसलमानों के साथ इंसाफ़ होगा। शाही इमाम ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़, कोसी कलां, बरेली और आंवला वग़ैरा मुक़ामात पर शरपसंदों की कार्यवाईयों और मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़ालिमाना जारिहाना कार्यवाईयों की शदीद मुज़म्मत की।

शाही इमाम ने आसाम के कोकराझार, धोबरी, चीराइंग और दीगर इलाक़ों में लाखों मुस्लमानों की बेबसी और नक़ल-ए-मकान-ओ-हलाकतों की शदीद अलफ़ाज़ में मुज़म्मत की। उन्होंने कहा कि बहुत अफ़सोस की बात है कि चंद मुस्लिम अरकान-ए-पार्लीमेंट ने आसाम मसला पर बात करने के लिए वज़ीर-ए-आज़म से वक़्त मांगा लेकिन उन्हें महरूम होना पड़ा नतीजतन उन्होंने वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम से मुलाक़ात करके याददाश्त पेश करके आसाम में अमन क़ायम करने का मुतालिबा किया।

आसाम को जलते हुए कई दिन हो गए लेकिन तरूण गोगोई की कांग्रेस हुकूमत तमाशाई बनी हुई है। आज दो लाख से ज़्यादा लोग पनाह गज़ीन बन चुके हैं और बेघर हो गए हैं। ऐसा लगता है कि तास्सुब ( धार्मिक पक्षपात) की आंधी में मुसलमान हलाक हो ( मारे जा) रहे हैं। अगर कांग्रेस की सैक्यूलर हुकूमतें हिफ़ाज़त नहीं कर सकतीं तो फिर कौन करेगा।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी हुकूमत से भी यू पी ए हुकूमत के अच्छे ताल्लुक़ात हैं और दोनों ही मुक़ामात पर मुसलमानों के साथ नाइंसाफ़ी हो रही है। इस की जितनी मुज़म्मत की जाय कम है। शाही इमाम ने वज़ीर-ए-आज़म, मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला और उत्तर प्रदेश और आसाम की रियास्ती हुकूमतों से मुसलमानों के तहफ़्फ़ुज़ ( हिफाजत) को यक़ीनी बनाने की अपील की और उन्हें भरपूर मुआवज़ा का मुतालिबा किया।

शाही इमाम ने मियांमार ( Mayanmar) में मुस्लिम कुशी की शदीद मुज़म्मत की। ग़ैर मुल्की शहरीयों के नाम पर लाखों मुसलमानों के मुस्तक़बिल ( भविष्य) को तारीक किए जाने पर शदीद अफ़सोस का इज़हार किया।

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