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आज़मीन हज के लिए पाँच साला पॉलिसी तय‌ करने का हुक्म

नई दिल्ली, 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने आज हुकूमत को आज़मीन हज को फ़राहम की जाने वाली ख़िदमात मूसिर बनाने के लिए पाँच साला पॉलिसी तय‌ करने की हिदायत दी, और मौजूदा सालाना मंसूबा को वक़्ती-ओ-गैर इत्मीनान बख़्श क़रार दिया। अदालत ने एक से ज़ाइद

नई दिल्ली, 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने आज हुकूमत को आज़मीन हज को फ़राहम की जाने वाली ख़िदमात मूसिर बनाने के लिए पाँच साला पॉलिसी तय‌ करने की हिदायत दी, और मौजूदा सालाना मंसूबा को वक़्ती-ओ-गैर इत्मीनान बख़्श क़रार दिया। अदालत ने एक से ज़ाइद मर्तबा फ़रीज़ा ए हज अदा करने वाले को जो बतौर महरम ख़ातून यह मुअम्मर आज़म के हमराह रवाना होजाए तो उसे सब्सीडी के बगैर इजाज़त देने की पॉलिसी को बरक़रार रखा।

अदालत ने उसे दरुस्त, दस्तूरी, गैर जांबदार और वाजिबी क़रार दिया। जस्टिस आफ़ताब आलम और जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई पर मुश्तमिल बैंच ने सरकारी नुमाइंदे की इस तजवीज़ को क़ुबूल करते हुए कहा कि सालाना असास पर तैयार की जाने वाली हज पॉलिसी एडहॉक और गैर इत्मीनान बख्श है, इस के बजाय मौजूदा पॉलिसी को तब्दील करते हुए पाँच साला असास पर पॉलिसी तय‌ की जानी चाहिए।

चुनांचे अदालत ने ये हिदायत दी कि जारिया साल तय‌ की जाने वाली पॉलिसी पाँच साल के लिए हो और उसे हज पॉलिसी 2013 ता 2017 ‍ क़रार दिया जाये। बैंच ने कहा कि हज पॉलिसी में ख़ातून आज़मीन की ज़रूरियात पर ख़ुसूसी तवज्जो दी जानी चाहिए और इस का मक़सद ये होना चाहिए कि ख़ातून आज़मीन का ये सफ़र पुरसुकून और इत्मीनान बख़्श रहे।

अदालत ने इस तजवीज़ को भी क़ुबूल किया कि हज का सारा अमल एक मुक़र्रर‌ वक़्त के अंदर मुकम्मल करलिया जाना चाहिए ताकि इतना वक़्त रहे जिस में दरख़ास्तों के शेडूल, जांच और दीगर उमूर को वक़्त से पहले क़तईयत दी जा सके। इस के बाद भी काफ़ी वक़्त होना चाहिए और हज पॉलिसी इस तरह तैयार की जाये कि आज़मीन को अहम तारीख़ के बारे में काफ़ी पहले इत्तेला दी जा सके और इस मामले में गैर लचकदार मौक़िफ़ इख़तियार करते हुए किसी भी कीमत पर शेडूल में तौसी ना की जाये।

अदालत ने सरकारी नुमाइंदे की एक और तजवीज़ को क़ुबूल करते हुए हिदायत दी कि हज कमेटी आफ़ इंडिया की जानिब से मुक़र्रर करदा टाइम शेडूल पर सख़्ती के साथ अमल किया जाये और कोई भी अथॉरिटी या अदालत इस मामले में मुदाख़िलत ना करें, क्योंकि ऐसी किसी मुदाख़िलत के नतीजे में टाइम शेडूल मुतास्सिर होता है। बैंच ने कहा कि ये हिदायत इन्फ़िरादी तौर पर बाज़ अफ़राद के फ़ैयदे के बजाय ज़्यादा फ़ायदे को पेशे नज़र रखते हुए दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने ख़ानगी टूर आपरेटर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती की पेश की हुई पॉलिसी को क़ुबूल करलिया, और कहा कि इस से किसी मख़सूस ऑपरेटर की इजारादारी की गुंजाइश नहीं रहेगी, और नए आपरेटर्स के दाख़िले का भी मौक़ा रहेगा।

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