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आज़ादाना-ओ-मुंसिफ़ाना इंतिख़ाबात को यक़ीनी बनाने पर ज़ोर

हैदराबाद 21 मई: जनाब ज़ाहिद अली ख़ान रुकन पोलित ब्यूरो तेलुगु देशम पार्टी और जनाब इब्राहीम बिन अबदुल्लाह मसक़ती साबिक़ रुकन क़ानूनसाज़ कौंसल ने इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया से मुतालिबा किया कि आंध्र प्रदेश और बिलख़सूस ग्रेटर हैदराबाद के

हैदराबाद 21 मई: जनाब ज़ाहिद अली ख़ान रुकन पोलित ब्यूरो तेलुगु देशम पार्टी और जनाब इब्राहीम बिन अबदुल्लाह मसक़ती साबिक़ रुकन क़ानूनसाज़ कौंसल ने इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया से मुतालिबा किया कि आंध्र प्रदेश और बिलख़सूस ग्रेटर हैदराबाद के हदूद में राय दही के मौक़ा पर बे क़ाईदगियों और बूथ पर क़बज़े जैसे वाक़ियात की रोक थाम के लिए सख़्त इक़दामात किए जाएं।
दोनों नेताओं ने इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया को इंतिख़ाबात में धांदलियों की रोक थाम और खासतौर पर गुंडा गर्दी, पोलिंग बोथस पर क़बज़े और मुक़ामी पुलिस की मदद से एक मख़सूस पार्टी के हक़ में राय दही जैसे वाक़ियात की रोक थाम के लिए ठोस तजावीज़ (प्रस्ताव) रवाना की हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादाना और मुंसिफ़ाना राय दही को यक़ीनी बनाना इलेक्शन कमीशन की ज़िम्मेदारी है और इलेक्शन कमीशन इस बात की कोशिश करता है कि मुक़ामी नज़म-ओ-नसक़ और खासतौर पर पुलिस इलेक्शन कमीशन से तआवुन(सहयोग) करते हुए आज़ादाना राय दही(स्वतंत्र मतदान ) को यक़ीनी बनाए, लेकिन अक्सर ये देखा जाता है कि मुक़ामी ओहदेदारों और खासतौर पर मुक़ामी पुलिस की मिली भगत से सयासी जमाअतें इंतिख़ाबी बदउनवानियों में मुलव्वस(लिप्त) होती हैं।

दूसरी जमातों के इलेक्शन एजंट्स पर गुंडा गर्दी के ज़रिये कंट्रोल हासिल कर लिया जाता है और इलेक्शन ओहदेदारों को डरा धमकाकर यकतरफ़ा राय दही का माहौल पैदा किया जाता है। जनाब ज़ाहिद अली ख़ान और जनाब इब्राहीम मसक़ती ने तजवीज़ पेश की कि आज़ादाना और मुंसिफ़ाना राय दही को यक़ीनी बनाने के लिए ज़रूरी है कि हर पोलिंग बूथ पर नीम फ़ौजी दस्तों (अर्ध सैनिक बल) को तैनात किया जाये। जब तक मुक़ामी पुलिस पोलिंग बुथ्स पर तैनात रहेगी, उस वक़्त तक अवाम आज़ादाना तौर पर अपनी राय का इज़हार नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रेटर हैदराबाद के हदूद में गुज़श्ता कई बरसों से ये रिवायत चल पड़ी है कि मुक़ामी ओहदेदारों और पुलिस के साथ एक मख़सूस जमात की मिली भगत से हक़ीक़ी राय दहनदों को अपने हक़ राय दही से महरूम कर दिया जाता है। सुबह के औक़ात से ही पोलिंग बुथ्स पर क़बज़े के वाक़ियात पेश आते हैं और शिकायत करने के बावजूद पोलीस तमाशाई का रोल अदा करती है। ज़रूरत इस बात की है कि पोलिंग बोथस के अतराफ़ अमन-ओ-ज़बत की बरक़रारी के लिए मुक़ामी पोलीस का इस्तिमाल किया जाये, लेकिन पोलिंग बोथस और इस के बाहर सी आर पी एफ यह फिर दीगर नियम फ़ौजी दस्तों को तैनात किया जाये। उन्हों ने कहा कि इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया हर इलेक्शन में नियम फ़ौजी दस्तों की ख़िदमात तो हासिल करता है, लेकिन उन्हें पोलिंग स्टेशनों पर तैनात नहीं किया जाता। इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया अगर आज़ादाना राय दही को यक़ीनी बनाना चाहे तो उसे चाहीए कि नियम फ़ौजी दस्तों को पोलिंग बोथस के अंदर और बाहर तैनात करे ताकि पोलिंग स्टाफ़ और अवाम दोनों की सकीवरीटी को यक़ीनी बनाया जा सके। जनाब ज़ाहिद अली ख़ान और जनाब इब्राहीम मसक़ती ने तजवीज़ पेश की कि पोलिंग बुथ्स और इस के बाहर सी सी कैमरे नसब किए जाएं ताकि गैर समाजी अनासिर और पोलिंग बोथस पर क़बज़ा करनेवाली मख़सूस टोलियों की सरगर्मियों पर नज़र रखी जा सके। एन सी सी कैमरों का कंट्रोल रुम मुताल्लिक़ा डिप्टी कमिशनर पोलीस, कमिशनर पोलीस और चीफ अलकटोरल ऑफीसर के दफ़्तर में होना चाहीए ताकि उन्हें हर पोलिंग बूथ में होने वाली नक़ल-ओ-हरकत की बरवक़्त इत्तिला मिल सके। इन क़ाइदीन (नेताओं) ने कहा कि सी सी कैमरों को नुक़्सान पहुंचाते हुए भी बोथस पर क़बज़े की कोशिश की जा सकती है।

लिहाज़ा जिस बूथ पर भी कैमरे को नुक़्सान पहुंचाया जाये, इस बूथ पर दुबारा राय दही का हुक्म दिया जाना चाहीए। उन्होंने इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया से मुतालिबा(मांग) किया कि प्रदेश में आज़ादाना राय दही के लिए सदर तेलुगु देशम एन चंद्रा बाबू नायडू ने जो तजावीज़ पेश की हैं, इन का भी बग़ौर जायज़ा लेते हुए अमली इक़दामात किए जाएं।

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