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आज़ाद मैदान तशद्दुद , मज़ीद दो गिरफ्तारियां , मयनमार से मुम्किना रवाबित

मुंबई, २३ अक्टूबर (पी टी आई) आज़ाद मैदान में 11 अगस्त को हुए पुरतशद्दुद ( भयानक दंगे) वाक़िया में मज़ीद ( और) दो अफ़राद ( लोगों) की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अब इस इलाक़ा में बैरूनी (विदेशी) हाथ के मुलव्वस होने के इमकानात पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ कर रही है क्

मुंबई, २३ अक्टूबर (पी टी आई) आज़ाद मैदान में 11 अगस्त को हुए पुरतशद्दुद ( भयानक दंगे) वाक़िया में मज़ीद ( और) दो अफ़राद ( लोगों) की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अब इस इलाक़ा में बैरूनी (विदेशी) हाथ के मुलव्वस होने के इमकानात पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ कर रही है क्योंकि तहक़ीक़ात के बाद ये बात सामने आई है कि एक गिरफ़्तार शूदा शख़्स ने तशद्दुद ( दंगे) के वाक़िया से क़बल और बाद में मयनमार को काल्स किए थे।

दो मुल्ज़िमीन (आरोपी) 25 साला यूसुफ़ अहमद हुसैन ख़ां और 40 साला सैयद सलीम अनवर पाशा को हफ़्ता ( शनिवार) के रोज़ गिरफ़्तार किया गया था। इस तरह अब तक इस मुआमले में गिरफ़्तार शूदा अफ़राद की तादाद 63 हो गई है।

63 के मिनजुमला 5 अफ़राद को नाकाफ़ी ( अपर्याप्त/Inadequate) शहादतों की बुनियाद पर रिहा कर दिया गया। डिप्टी पुलिस कमिशनर अंबादास पोटे ने कहा कि यूसुफ़ को इस वक़्त गिरफ़्तार किया गया जब इस के बारे में ये इन्किशाफ़ ( ज़ाहिर) हुआ कि इस ने मुबय्यना तौर पर मयनमार को फ़ोन काल्स किए थे, अलबत्ता अंबादास ने ये नहीं बताया कि मुल्ज़िम यूसुफ़ उस वक़्त आज़ाद मैदान में मौजूद था या नहीं और तशद्दुद बरपा ( दंगे) करने वालों में शामिल था या नहीं।

एक दीगर ( दूसरे) आफीसर के मुताबिक़ यूसुफ़ ने तशद्दुद ( दंगे) के वाक़िया से क़बल और बाद में मयनमार काल्स किए थे ताकि वहां से मालूम हासिल कर सके लिहाज़ा ये कहा जा सकता है कि आज़ाद मैदान वाक़िया में मयनमार का भी कोई रब्त है।

दूसरी तरफ़ सैयद सलीम को पड़ोसी रियासत कर्नाटक के शहर मैसूर से गिरफ़्तार किया गया था क्योंकि सलीम 11 अगस्त को तशद्दुद बरपा ( दंगा) करने वालों में मौजूद था जिस में मुंबई के आज़ाद मैदान के हालात बहुत ज़्यादा ख़राब हो गए थे और पुलिस को फायरिंग करने पर मजबूर होना पड़ा था जिस में 2 नौजवान हलाक और 52 अफ़राद बिशमोल ( जिसमें) 44 पुलिस अहलकार शदीद तौर पर ज़ख़मी हुए थे।

आसाम और मयनमार में मुसलमानों के ख़िलाफ़ फ़सादाद बरपा (दंगे) करने और क़त्ल-ए-आम के ख़िलाफ़ एक एहतिजाजी रैली का नज़म ( आयोजन) किया गया था लेकिन एहतिजाज अचानक पुरतशद्दुद (भयानक दंगे मे तबदील) हो गया और एहतिजाजियों ने पुलिस को निशाना बनाना शुरू किया।

पुलिस और मीडीया की वैन्स ( Vans) को नज़र-ए-आतिश कर ( जला) दिया गया। वहां मौजूद सहाफ़ीयों ( पत्रकारो) के कैमरे तोड़ दिए गए और बेस्ट बसों को भी नुक़्सान पहुंचाया गया था।

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