Tuesday , October 17 2017
Home / test / इंजीनियरिंग कॉलेजों में होने वाले दाखिलों में एक लाख से ज्यादा की कमी : रिपोर्ट

इंजीनियरिंग कॉलेजों में होने वाले दाखिलों में एक लाख से ज्यादा की कमी : रिपोर्ट

दिल्ली : इंजीनियरिंग कॉलेजों में जाने के लिए मारामारी के दिन हवा हो चुके हैं. आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों को छोड़ दें तो बीते दो साल के भीतर देशभर के इंजीनियरिंग कॉलजों में होने वाले दाखिलों में करीब एक लाख तक की कमी आई है. पिछले साल तो ज्यादातर कॉलेजों की आधी सीटें भी नहीं भर पाईं.

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक

देशभर में करीब
3,365 इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान हैं.
इनमें 16,32,470 सीटें हैं.
इस शिक्षा सत्र में इनमें से सिर्फ 8,36,640 सीटें ही भर सकीं.
इन कॉलेजों में मात्र 3,40,531 बच्चों का प्लेसमेंट हुआ.

रिपोर्ट के मुताबिक, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की हाल में ही हुई बैठक में इस बदले चलन पर खासी चिंता जताई गई. मध्यप्रदेश और ओडिशा जैसे प्रदेशों ने मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय से आग्रह किया था कि इस क्षेत्र में प्रतिभाओं की मांग और अापूर्ति का आकलन किया जाए. इसी सिलसिले में एआईसीटीई की यह बैठक हुई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक इस चलन की एक बड़ी वजह यह हो सकती है कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नौकरियों का बाजार लगभग ठहरा हुआ है जबकि दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं. इसके अलावा देश के विभिन्न संस्थानों से निकलने वाले इंजीनियर बाजार की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाते. इससे भी उनके लिए नौकरियों के अवसर काफी हद तक सीमित हो जाते हैं.

इस संबंध में दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति दीपक पेंटल कहते हैं, ‘इंजीनियरिंग संस्थानों से पढ़कर निकलने वाले ज्यादातर बच्चे किसी कार्य विशेष में कुशल नहीं होते. जाहिर तौर पर इससे उन्हें रोजगार नहीं मिलता.’ साल 2011 में किया गया नैसकॉम का एक सर्वे भी बताता है कि महज 25 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ही नौकरी के लायक होते हैं.और पिछले एक दशक में इन हालात में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है.

हालांकि एआईसीटीई के एक अधिकारी बताते हैं, ‘निजी कॉलेज हमारी इजाजत लिए बिना ही लगातार सीटें बढ़ाते रहते हैं. इससे भी कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं क्योंकि ज्यादातर बच्चे प्राइवेट कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ही प्रवेश लेते हैं. इनके बारे में पूरी पुख्ता जानकारी एआईसीटीई के पास भी उपलब्ध नहीं होती. दाखिलों की तादाद में गिरावट का जो आंकड़ा दिख रहा है, उसकी एक वजह यह भी हो सकती है.

TOPPOPULARRECENT