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इंजीनीयरिंग कॉलिजस में एन आर आई कोटा से ज़ाइद नशिस्तों की फ़रोख़त

हैदराबाद16 मई (एजैंसीज़) रियासत के इंजीनीयरिंग कॉलिजों में एन आर आई कोटा के तहत नशिस्तों के मसला पर कॉलिजों की अंजुमनों के साथ एक नया तनाज़ा उठ खड़ा हुआ है। चंद मख़सूस इदारों को ही मुबय्यना तौर पर इस इनायत की पीशकशी पर सी बी आई के ज़र

हैदराबाद16 मई (एजैंसीज़) रियासत के इंजीनीयरिंग कॉलिजों में एन आर आई कोटा के तहत नशिस्तों के मसला पर कॉलिजों की अंजुमनों के साथ एक नया तनाज़ा उठ खड़ा हुआ है। चंद मख़सूस इदारों को ही मुबय्यना तौर पर इस इनायत की पीशकशी पर सी बी आई के ज़रीया तहक़ीक़ात का मुतालिबा किया जाने लगा ही। ऑल इंडिया कौंसल फ़ार टेक्नीकल एजूकेशन (ए आई सी टी ई) के क़वाइद के तहत सिर्फ़ 5 फ़ीसद नशिस्तें ही इन आर आई कोटा के तहत अलॉट करने की गुंजाइश फ़राहम है ताहम ये इल्ज़ाम आइद किया गया कि रियास्ती हुकूमत ने चंद बावक़ार इदारों को 15 फ़ीसद नशिस्तें ऐसे तलबा-ए-के लिए मुख़तस करने की इजाज़त दी है जो इस कोटा के तहत फ़ीस की अदाई के मुतहम्मिल हैं। ऐसा ए आई सी टी ई के क़वाइद की सरिया ख़िलाफ़वरज़ी करते हुए इन आर आई कोटा के मुतबादिल एन आर आई फ़िक़रा रखते हुए किया गया हैं ।

ये इल्ज़ाम आइद किया गया कि इस का फ़ायदा उठाते हुए चंद सरकरदा कॉलिजस खुले तौर पर नशिस्तें फ़रोख़त कररहे हैं। कनसोरशीम आफ़ इंजीनीयरिंग ऐंड प्रोफ़ैशनल कॉलिजस मैनिजमंट एसोसी उष्णस आफ़ आंधरा प्रदेश ने इस मुआमला की सी बी आई के ज़रीया तहक़ीक़ात का मुतालिबा करते हुए इल्ज़ाम आइद किया कि चंद बे मराम वुज़रा और सरकारी ओहदेदारों ने चंद नामवर इदारों से रिश्वत हासिल करते हुए क़वाइद में रियायत फ़राहम की ही। जनरल सैक्रेटरी कनसोरशीम मिस्टर एन रमेश ने कहा कि 600 नशिस्तों की गुंजाइश वाले एक कॉलिज को ए आई सी टी ई के क़वाइद में रियायत फ़राहम करते हुए 90 तलबा-ए-को एन आर आई कोटा में दाख़िला देने की इजाज़त दी ही। इस तरह से ये कॉलिजस 9 करोड़ रुपय का इज़ाफ़ी मुनाफ़ा हासिल कर रहे हैं।

उन्हों ने कहा कि ये कॉलिजस वुज़रा और मुताल्लिक़ा ओहदेदारों को रिश्वत की पेशकश करते हुए क़वाइद में नरमी हासिल कर रहे हैं इसी लिए हम सी बी आई के ज़रीया तहक़ीक़ात का मुतालिबा करते हैं। इस हर्बा के हिस्सा के तहत एमसीट के ज़रीया मेरिट की असास पर नशिस्त पाने में नाकाम तलबा-ए-से कहा जाता है कि वो दाख़िला पाने के लिए किसी ग़ैर मुक़ीम हिंदुस्तानी से एक मकतूब हासिल करे कि वो उन्हें स्पांसर करते हैं ताहम हक़ीक़तन ऐसे तलबा-ए-के वालदैन ही सारी फ़ीस की अदाई करते हैं। हुकूमत एन आर आई कोटा के तहत कॉलिज इंतिज़ामीया को एडमीशन ऐंड फ़ी रैगूलेटरी कमेटी की मुक़र्ररा हद के मुताबिक़ सालाना 5,000 डालर फ़ीस की वसूली की इजाज़त दे देती हैं ।

ये रक़म तक़रीबन फ़ी तालिब-ए-इल्म 2.5 लाख रुपय होती है जबकि रैगूलर फ़ीस सालाना 95,000 रुपय ही हैं । इलावा अज़ीं ए आई सी टी आई क़वाइद की रो से उन आर आई कोटा के तहत दाख़िला पाने वाले तलबा-ए-से सिर्फ डॉलर्स की शक्ल में ही फ़ीस वसूल की जानी चाहीए ताहम ये कॉलिजस रुपया की शक्ल में ऐसे तलबा-ए-से फ़ीस वसूल करते हैं और ऐसा करना मिस्र हा क़वाइद की एक और ख़िलाफ़वरज़ी हैं

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