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इंटरनेट पर मसाजिद, दर्गाहें और तारीख़ी आसार की तफ़सील नदारद, वक़्फ़ बोर्ड तवज्जादे

अब्बू एमल-   हैदराबाद को जहां मीनारों और मस्जिदों का शहर कहा जाता है, वहीं दरगाहों, दरबारों, आस्तानों, मज़ारों और मक़बरों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। इस के चप्पा चप्पा और गली कूचों में इन बुज़्रगान-ए-दीन - की आराम गाहैं हैं, जो अप

अब्बू एमल-   हैदराबाद को जहां मीनारों और मस्जिदों का शहर कहा जाता है, वहीं दरगाहों, दरबारों, आस्तानों, मज़ारों और मक़बरों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। इस के चप्पा चप्पा और गली कूचों में इन बुज़्रगान-ए-दीन – की आराम गाहैं हैं, जो अपने वक़्त के बलंद पाया मुत्तक़ी परहेज़गार, शब बेदार और फ़ना फ़ील्लाह, औलिया-ए-अल्लाह में से शुमार होते थे, जिन के दस्त हक़ पर लाखों बंदगान ख़ुदा ने बैअत करके इर्फ़ान-ओ-मार्फ़त का जाम नोश किया।

लिल्लाहियत के सख़्त तरीन रास्ता को बा आसानी तए किया है और उन बुज़्रगान-ए-दीन – की सोहबत बा बरकत में रह कर अपने वक़्त के आफ़ताब-ओ-महताब बने। सरज़मीन हैदराबाद को बजा तौर पर फ़ख़र हासिल है कि वो अल्लाह के महबूब, नेक और प्यारे बंदों का मस्कन है। इस की ख़ाक तले ना जाने कितने ख़ुदा रसीदा और आशिक़ान रसूल आराम फ़र्मा रहे हैं, जिन्हों ने अपने वक़्त में पूरे दिन को इलम-ओ-मार्फ़त की रोशनी से मुनव्वर करदिया था।

इन के ज़माने में हर चहार जानिब ज़िक्र अल्लाह की सदाएं गूंजती थीं, जहां चारमीनार, क़िला गोलकुंडा, मक्का मस्जिद, ख़लवत महल और इस्लामियान दक्कन की अज़मत रफ़्ता की याद ताज़ा करने वाले तारीख़ आसार-ओ-इमारात दुनिया भर के सय्याहों के लिए बाइस तवज्जा बनी हुई हैं। वहीं बहुत से हज़रात सिर्फ उन बुज़्रगान-ए-दीन – के आस्तानों पर हाज़िरी देने और उन की ज़यारत से मुशर्रफ़ होने केलिए पूरी दुनिया, दीगर रियास्तों, अज़ला और देहातों से हैदराबाद का रुख करते हैं।

इन के सालाना उरस शरीफ़ के मौक़ा पर पर ईद जैसी ख़ुशी का माहौल रहता है। लोग जौक़ दर जौक़ आकर फ़ातिहा ख़वानी करते हैं। उसे मवाक़े पर तमाम दरगाह शरीफ़ में ज़ाइरीन और हाज़िरीन के लिए बहुत आरामदेह और बेहतरीन नज़म इंतिज़ामीया की जानिब से किया जाता है। क़ाबिल मुबारकबाद हैं वो हज़रात जिन्हें औलिया-ए-अल्लाह के आस्तानों की निगरानी का मौक़ा मयस्सर आया और वो सआदत मंदी से इस फ़रीज़ा को बख़ूबी अंजाम दे रहे हैं।

सज्जादा नशीन हज़रात की ख़िदमात जलीला लायक़ सताइश और बाइस रशक हैं जो एक अर्सा से उन दरगाहों के मुस्तक़िल मुहाफ़िज़ और निगरान कार हैं, जिन्हों ने अपनी क़ीमती ज़िंदगी अल्लाह के सालिह बंदों के दरबारों की हफ़ातत की नज़र करदी, लेकिन अफ़सोस कि हमारी अवाम बुज़्रगान-ए-दीन – की दरगाह शरीफ़ से ख़ातिर ख़वाह मालूमात नहीं रखती। इस पस-ए-मंज़र में आज हम शहर के चार बड़ी और मशहूर दरगाह शरीफ़ के अहवाल और इस की वुसअत पर कुछ आगही फ़राहम करते हैं, लेकिन कोई इस का ग़लत मतलब निकालने की बिलकुल जुर्रत ना करे।

हमारा म क़सद सिर्फ और सिर्फ उन बुज़्रगान-ए-दीन – के चाहने वालों को उन की दरगाह शरीफ़ की मालूमात पहुंचाना है, जिस का उन्हें पूरा पूरा हक़ हासिल है। हमारा मक़सद ना किसी के ख़िलाफ़ अंगुश्त नुमाई करना है और ना ही किसी के हवाले से शकूक-ओ-शुबहात की लकीर खींचनी है। हम शहर के उसे चार दरगाह शरीफ़ की मालूमात सपुर्द क़िरतास करते हैं जो इंतिहाई शौहरत की हामिल हैं और उन के तहत वसीअ-ओ-अरीज़ अराज़ी हैं।

दरगाह हज़रात यूसुफ़ैन (र) के बारे में कौन नहीं जानता। आफ़ताब दक्कन हज़रात सय्यद यूसुफ़ैन (र) के दरबार शरीफ़ के तहत वक़्फ़ बोर्ड की गज़्ट में दर्ज रिकार्ड के मुताबिक़ 30 हज़ार 834 मुरब्बा गज़ मौक़ूफ़ा अराज़ी है, जिस की मुकम्मल वक़्फ़ तफ़सीलात इस तरह हैं। HYD/353 Dargah Yousufain With Masjid Ashoorkana, Grave Yard, Abdar Khana, Sama Khana, Niyaz Khana, (S) (58) Nampally, Ward-5, Sq,yds, 30,834,0, GAZ-No-30-A, SI- No- 1688, GAZ Date- 16-08-1984, Page No-11 । इस तरह दरगाह हज़रत सय्यद शाह मीरा हुसैनी बग़्दादी बाबा (र) जो लनगर हाउज़ में वाक़ै है और इसी नाम से शौहरत रखती है। इस के तहत भी दर्ज वक़्फ़ मौक़ूफ़ा अराज़ी 76 हज़ार 52 मुरब्बा गज़ अराज़ी है। वक़्फ़ बोर्ड की गज़्ट में इस का रिकार्ड इस तरह मौजूद है। HYD/621 Dargah HZT Ghouse Sani Syed Shah Meerah Hussain, Qadri, (S) (125) Langer House- Ward- (9) (76,052,3 sq,yds) GAZ, No-17- A- SI- No- 337, Date/GAZ/26-04-1984, pg-14

और अहमद नगर में वाक़ै दरगाह हज़रत सय्यद अहमद बादपा (र) के तहत दर्ज वक़्फ़ अराज़ी 58 हज़ार 566 मुरब्बा गज़ अराज़ी है। इस का वक़्फ़ गज़्ट में मौजूद रीकाड हसब-ए-ज़ैल है। HYD/700 Dargah Sayed Ahmed Badepa, 1. Masjid Madarsa, Grave Yard. No-MCH, 10-6-29, (S) (26) Ahmed Nagar (10-6-2/4) 2/1, Ward- 10 Sq.yads (58,566,1) GAZ-32-A, Sl, No- 1760, Date- GAZ/30-08-1984, pg-21-

आख़िरी दरगाह शरीफ़ जिस का वक़्फ़ रिकार्ड वो इस तरह है। दरगाह हज़रत सय्यद शाह राजू हुसैनी (र)(मिस्री गंज) के नाम से मशहूर है। इस दरगाह के तहत मौक़ूफ़ा अराज़ी 60 हज़ार 597 मुरब्बा गज़ अराज़ी है। और इस का वक़्फ़ रिकार्ड दर्ज जे़ल है। HYD/2015 Dargah Syed Shah Raju Hussani, Gumbad & Grave Yard- No- 19-2-20 (S) (147) Ward- 19 (60,597,8 Sq.yds) GAZ- 6/A, SI, No – 2151, Date 09-02-1985,pg- 37 Address- Misrigung

क़ारईन ये जदीद टैक्नालोजी का दौर है। इंटरनेट जो मालूमात का समुंद्र है। पूरी दुनिया इस से मुस्तफ़ीद हो रही है और दूसरों को फ़ायदा पहुंचा रही है। दुनिया के तमाम मह्कमाजात की मुकम्मल तफ़सीलात नैट पर दस्तयाब हैं, जब चाहें ऑनलाइन उन्हें देखा जा सकता है और अपनी मालूमात में इज़ाफ़ा किया जा सकता है, लेकिन हमारे वक़्फ़ बोर्ड का रिकार्ड, मसाजिद, मदारिस, दरगाह शरीफ़ और तारीख़ी आसार की कुछ भी तफ़सील मौजूद नहीं।

वक़्फ़ बोर्ड को चाहीए कि तमाम औक़ाफ़ी जायदाद की पूरी तफ़ासील नैट पर फ़राहम करे ताकि घर बैठे जो चाहे किसी भी मस्जिद, दरगाह शरीफ़ और तारीख़ी इमारत की मुकम्मल वक़्फ़ अराज़ी और दीगर तफ़सीलात से आगही हासिल करसके और ये मालूमात हासिल करना हर शहरी का क़ानूनी हक़ है जबकि हाल ये है के अगर कोई वक़्फ़ बोर्ड के दफ़्तर में किसी मौक़ूफ़ा अराज़ी के मुताल्लिक़ जानकारी हासिल करने जाता है तो इस से दरख़ास्त दाख़िल करने को कहा जाता है

और इतने दिनों तक टाल मटोल की जाती है कि बार बार इस से दफ़्तर के चक्क्र कटवाए जाते हैं जब तक वक़्फ़ ज़मीन हाथ से निकल कर हवा हो चुकी होती है। लिहाज़ा ज़रूरी है के इंटरनेट पर तमाम वक़्फ़ तफ़सीलात फ़राहम की जाएं। क़ारईन उन दरगाहों की अराज़ी से आप को वाक़िफ़ कराने का मक़सद यही है कि इन का तहफ़्फ़ुज़ हो, बहुत सी दरगाह शरीफ़ ऐसी हैं जिन की हिसारबंदी भी नहीं हुई जैसे हज़रत जहांगीर पीरां (र) की दरगाह शरीफ़ निज़द वाक़ै शादनगर, इस दरगाह शरीफ़ से कोई वाक़िफ़ नहीं है।

इस के तहत तक़रीबन 25 एकड़ वक़्फ़ अराज़ी है, जिस की हिसारबंदी हनूज़ नहीं होसकी। आज काशत कररहे हैं कल दावा भी कर सकते हैं। नुक़्सान किस का होगा, सिर्फ एक महिकमा की लापरवाही से क़ीमती ज़मीन हाथ से निकल जाएगी। इस तरह सैंकड़ों ऐसी बारगाहें और मसाजिद हैं जिन की अराज़ी की हिसारबंदी नहीं हो सकी है और जिन पर लैंड माफ़िया का ख़तरा मंडला रहा है। abuaimalazad@gmail.com

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