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इंटर टॉपर घोटाला : 5 लाख रुपए में बिक रहे थे सर्टिफिकेट

पटना : इंटर टॉपर घोटाला केस में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एसआईटी को अपनी जांच में पता चला है कि इंटरमीडिएट के जाली सर्टिफिकेट पांच लाख रुपए में बेचे जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए एक शख्स ने एसआईटी को यह जानकारी दी है। उसने बताया कि पांच लाख रुपए में इंटरमीडियट का फर्जी सर्टिफिकेट कोई भी स्टूडेंट हासिल कर सकता है। इसके लिए न तो नामांकन की जरूरत है और न ही परीक्षा में बैठने की।

टॉपर घोटाले में मंगल को देर शाम तक एसआईटी ने वैशाली के विशुन राय कॉलेज में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान एसआईटी को कॉलेज के कार्यालय से कई आपत्तिजनक सामान हाथ लगे हैं। छापेमारी के बाद एसआईटी ने कॉलेज के कार्यालय सहित पांच कमरों को सील कर दिया है। छापेमारी के दौरान एसआईटी ने कॉलेज के कार्यालय से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में पदस्थापित विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों की सात मुहर के अलावा 2014 के इंटर परीक्षा की लिखी हुई कॉपियां, सादा एडमिट कार्ड तथा 52 सौ रुपए बरामद किया गया है।

कॉलेज के प्राचार्य अमित कुमार उर्फ बच्चा राय के साथ बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह के बीच सांठगांठ के खुलासे के बाद यहां विशुन राय कॉलेज में पांचवें दिन भी एसआईटी की टीम ने कॉलेज में रखे गए कागजातों की गहन जांच-पड़ताल की। जांच के क्रम में लगातार एसआईटी टीम को महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है।

एसआईटी टीम की कियादत कर रहे इंस्पेक्टर बीके शाही ने बताया कि कॉलेज में जांच के क्रम में कई और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। शाही ने बताया कि जांच के क्रम में अब तक 18 लाख रुपए भी बरामद हुए हैं। उन्होंने बताया कि इंटर टॉपर घोटाले में अभी और जांच पड़ताल होगी। एसआईटी टीम के साथ एडिशनल एसपी अभियान अनुपम कुमार भी शामिल थे।
इंटर टॉपर घोटाले में एसआईटी की जांच के जद में आए विशुन राय कॉलेज परिसर में स्थित बैंक ऑफ इंडिया पर भी जांच का असर पड़ रहा है। जांच अवधि के दौरान पिछले पांच दिनों से एसआईटी की टीम बैंक उपभोक्ताओं को बैंक में नहीं जाने दे रह हैं।

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