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इंडोनेशिया में शदीद ज़लज़ला , सूनामी की वार्निंग वापस ली गई

इंडोनेशिया के साहिल के क़रीब ज़बरदस्त ज़लज़ला के दो झटके महसूस किए गए जिन से तबाहकुन सूनामी का ख़तरा पैदा हो गया था और पूरे मुल्क में दहशत की लहर दौड़ गई थी । बहर-ए-हिंद के साहिल पर वाक़्य तमाम ममालिक में सूनामी की चौकसी का ऐलान कर दिया गय

इंडोनेशिया के साहिल के क़रीब ज़बरदस्त ज़लज़ला के दो झटके महसूस किए गए जिन से तबाहकुन सूनामी का ख़तरा पैदा हो गया था और पूरे मुल्क में दहशत की लहर दौड़ गई थी । बहर-ए-हिंद के साहिल पर वाक़्य तमाम ममालिक में सूनामी की चौकसी का ऐलान कर दिया गया था ।

ताहम कोई ख़तरनाक मौजें या तबाहकारी की कहीं से कोई इत्तिला नहीं मिली । एक के बाद दीगरे दो शदीद ज़लज़ले के झटके जिन की शिद्दत रीख़तर पैमाना पर 8.5 और 8.2 रिकार्ड की गई थी महसूस किए गए जिन का मब्दा इंडोनेशिया के साहिल से 435 किलो मीटर दूर 33 किलो मीटर समुंद्र की गहराई में था ।

हवाई के सूनामी इंतेबाह मर्कज़ से इंतेबाह जारी होने के बाद जिस में बहर-ए-हिंद के साहिल पर क़ायम आस्ट्रेलिया से लेकर हिंदूस्तान तक बिशमोल आफ्रीका तमाम ममालिक को ख़बरदार किया गया था लेकिन कोई मोहलिक मौजें नहीं उठीं और ना कहीं से कोई बड़े पैमाना पर नुक़्सान की इत्तिला मिली जिस के बाद सूनामी के इंतेबाह से दसतबरदारी इख्तेयार कर ली गई ।

इंडोनेशिया के सूबा बांदा आचीहा के साहिल के क़रीब ज़लज़ले के मब्दा के पास सिर्फ 80 सेंटी मीटर बुलंद सूनामी की मौजें पैदा हुईं जो साहिल की तरफ़ पेशरफ़्त कर रही थीं लेकिन इससे कहीं भी कोई बड़े पैमाना का नुक़्सान नहीं हुआ । बांदा आचीहा से ज़मीन ज़ोर से हिलने की इत्तेलात ( खबर) मिली हैं । ज़मीन की ये लरज़िश तक़रीबन 5 मिनट जारी रही और कुछ वक़्त के लिए टेलीफ़ोन लाइंस नाकारा हो गयी ।

दहशत ज़दा लोग अपने मकानों से बाहर निकल आए और पनाह के लिए दौड़ने लगे । ज़लज़ले के झटके जुनूबी और मशरिक़ी हिंदूस्तान , श्रीलंका , आस्ट्रेलिया , थाईलैंड , सिंगापुर और मलेशिया में भी महसूस किए गए । यहां भी सूनामी का इंतेबाह जारी किया गया था जिस से बाद में दसतबरदारी इख्तेयार की गयी ।

हिंदूस्तान में तमिलनाडू , केरला , कर्नाटक , अंडमान-निकोबार , आसाम और मग़रिबी बंगाल में ज़लज़ला के झटके महसूस किए गए । क़ब्लअज़ीं अवाम मुतास्सिरा इलाक़ों से महफ़ूज़ इलाक़ों को मुंतक़िल होते हुए देखे गए । वो हर दस्तयाब ज़रीया से सफ़र कर रहे थे । हर जगह ट्रैफ़िक जाम थीं ।

अमेरीकी निग्र नक़्क़ारों ने पूरे बहर-ए-हिंद में सूनामी पर नज़र रखने की वार्निंग दी थी लेकिन इस बात का यक़ीन ज़ाहिर नहीं किया था कि देवक़ामत लहरें उठ सकती हैं । इतनी शिद्दत का ज़लज़ला आम तौर पर सूनामी पैदा करता है । और वसीअ पैमाने पर तबाही फैलाता है जिससे बहर-ए-हिंद के पूरे साहिली इलाक़ों में तबाही फैल सकती है ।

ज़लज़ले के पेशे नज़र थाईलैंड , सिंगापुर , मलेशिया और श्रीलंका में सूनामी का इंतेबाह जारी किया गया था । ताहम बाद में इस से दसतबरदारी इख्तेयार कर ली गयी । सब से बड़ा झटका थाईलैंड के तफ़रीही जज़ीरा फोकीट में महसूस किया गया । टेलीफ़ोन लाइंस नाकारा हो गई । एक लक्झरी होटल का तख़लिया करवा दिया गया । श्रीलंका में भी सूनामी की वार्निंग से दसतबरदारी इख्तेयार कर ली गयी ।

इंडोनेशिया का ज़लज़ला श्रीलंका में भी महसूस किया गया । लोग अपने घरों से मुक़ामी वक़्त के मुताबिक़ 2.15 बजे बाहर निकल आए और महफ़ूज़ मुक़ामात को मुंतक़िल होने लगे । श्रीलंका के साहिली इलाक़ा का एक तिहाई दिसम्बर 2004 की सूनामी में तबाह हो गया था और 30 हज़ार से ज़ाइद अफ़राद हलाक हो गए थे । 26 दिसम्बर 2004 को इंडोनेशिया के जज़ीरा समाटरा में 9.2 शिद्दत का ज़लज़ला आया था ।

जिस की लपेट में हिंदूस्तान समेत कई ममालिक आ गए थे । गुज़श्ता साल भी 9 शिद्दत के ज़लज़ले के बाद जापान में सूनामी से न्यूक्लियर प्लांट तबाह हो गया था और 19 हज़ार अफ़राद हलाक हो गए थे । तमिलनाडू में ज़लज़ला के झटके महसूस किए गए ताहम सूनामी का कोई इंतेबाह जारी नहीं किया गया ।

मुंबई में चीफ़ मिनिस्टर चावान ने अपने ब्यान में कहा कि सूनामी का कोई ख़तरा नहीं है । रियासत उडीशा के साहिल पर चौकसी का ऐलान जारी किया गया । तमिलनाडू में ज़लज़ला के झटके तरीची , सेलम , कंवर , कोयमबटूर , उधागा मंडलम , मदूराए और जुनूबी अज़ला में महसूस किए गए ।

शुमाली मुंबई के बाअज़ ( कुछ) इलाक़ों में ज़लज़ले के झटके महसूस किए गए लेकिन महकमा-ए-मौसीमीयत की जानिब से इस की तौसीक़ हनूज़ हासिल नहीं हुई । उडीशा में माही ग़ैरों को समुंद्र में ना जाने की एहतियाती इक़दाम के तौर पर हिदायत दी गई थी । रियासत में हल्के झटके महसूस किए गए ।

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