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इंतेजामिया फ्रायज़ की अंजाम देही में नाकाम

जो काम इंतेजामिया और मुक़ामी महकमा को खुद करना चाहिए उस काम के लिए हाई कोर्ट को उनके पीछे पड़ना पड़ा। उन्हे बार बार अपनी ज़िम्मादारी निभाने को कहा गया जिसके बावजूद इंतेजामिया टाल मटोल करती रही।

जो काम इंतेजामिया और मुक़ामी महकमा को खुद करना चाहिए उस काम के लिए हाई कोर्ट को उनके पीछे पड़ना पड़ा। उन्हे बार बार अपनी ज़िम्मादारी निभाने को कहा गया जिसके बावजूद इंतेजामिया टाल मटोल करती रही।

बिला खैर हाई कोर्ट को सबकी निगरानी करनी पड़ी तब जा कर कूड़ा-कचड़ा, खटाल, गैर क़ानूनी कब्जा कुछ हद तक हटा। मेडिकल कॉलेजों से गैर कानूनी कब्जा हटाना, शहर के ट्राफिक निज़ाम दुरुस्त करने, तालीमी अदारों और मजहबी मुकामात के पास शराब की दुकाने नहीं खोलने, तालीम के मेयार में सुधार लाने और कारगुजार वाइस चांसलरों की नाकामी पर रोक लगाने तक का काम हाई कोर्ट को करना पड़ा इसके इलावा हाई कोर्ट को देही इलाकों के अस्पताल इलाकों की अस्पतालों में बुनियादी सहूलतें मुहैया कराने, माजूरों और दिमागी अस्पताल की सुरते हाल सुधारने पर भी ऑर्डर जारी करना पड़ा। हाई कोर्ट को कहना पड़ रहा है के अफ़सरान अदालती हुक्म के बावजूद कुछ नहीं करते।

उनके पास पूरी सोर्स है या नहीं वो अपनी ज़िम्मादारी नहीं निभाते जो काम उन्हें करना चाहिए वो भी नहीं करते यहाँ तक के अदालती हुक्म पर अमल भी नहीं करते। हाई कोर्ट ने सेक्यूरिटी सतह के बेशतर हुक्काम के बारे में यहाँ तक कह दिया के वो कानून ही नहीं जानते और तमाम काम पाने मुफाद के लिए करते हैं यहाँ तक के बेगैर ज़मीन तहवील मे लिए लोक सभा स्पीकर मीरा कुमार की ज़मीन पर सड़क बना लेने का मामला भी सामने आया इसके लिए स्पीकर को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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