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इक्तेदार के लिए ईमान तक छोड़ने को तैयार मोदी

भारतीय जनता पार्टी की जानिब से अगले वजीर-ए-आजम की हैसियत से पेश किये किए गए गुजरात के वजीर-ए-आला नरेन्द्र मोदी इक्तेदार पाने के लिए इतने उतावले हैं कि उन्हें मुसलसल झूट बोलने, लफ्फाजी करने, आवाम को गुमराह करने, कश्मीर को खुसूसी दर्ज

भारतीय जनता पार्टी की जानिब से अगले वजीर-ए-आजम की हैसियत से पेश किये किए गए गुजरात के वजीर-ए-आला नरेन्द्र मोदी इक्तेदार पाने के लिए इतने उतावले हैं कि उन्हें मुसलसल झूट बोलने, लफ्फाजी करने, आवाम को गुमराह करने, कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली दफा-370 को खत्म करने, अयोध्या में आलीशान राम मंदिर की तामीर कराने और मुल्क में यूनिफार्म सिविल कोड नाफिज किए जाने जैसे आरएसएस और बीजेपी के पुराने मुद्दे भुलाने, यहां तक कि अपना दीन ईमान तक छोड़ने में कोई गुरेज नहीं है।

आवामी मीटिंगों में झूट बोलकर लोगों को गुमराह करने से वह किसी भी कीमत पर बाज नहीं आ रहे हैं, इसीलिए जम्मू की पब्लिक मीटिंग में उन्होंने बड़ी सफाई से झूट बोलते हुए कह दिया कि कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली दस्तूर की दफा-370 से रियासत के आवाम को कोई फायदा नहीं पहुंचा, उल्टे रियासत की लड़कियों का हक मारा जाने लगा है। इसी के साथ उन्होंने कह दिया कि जम्मू-कश्मीर में जो इख्तेयारात और हुकूक वजीर-ए-आला उमर अब्दुल्लाह को हासिल हैं, वैसे ही इख्तेयारात और हुकूक उनकी बहन साराह को हासिल नहीं है, क्योंकि साराह की शादी जम्मू कश्मीर रियासत से बाहर हुई है।

इसलिए दफा- 370 पर खुलकर बहस होनी चाहिए। मोदी के इस बयान के फौरन बाद बिहार के वजीर-ए-आला नितीश कुमार की तरह जम्मू-कश्मीर के वजीर-ए-आला उमर अब्दुल्लाह ने भी मोदी पर सख्त हमला करते हुए कहा कि मोदी या तो झूट बोल रहे हैं या उन्हें मुल्क के आईन और दफा-370 के सिलसिले में कोई मालूमात ही नहीं है। उमर ने कहा कि रियासत से बाहर शादी करने वाली कश्मीरी लड़कियों के हुकूक का मामला वैसे तो 2001 में ही तय हो गया था लेकिन 2004 में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद यह मसला पूरी तरह हल हो चुका है। अगर किसी कश्मीरी लड़की की शादी रियासत से बाहर हो जाती है तो जम्मू कश्मीर में उसको मिलने वाले इख्तेयारात और हुकूक भी खत्म हो जाते थे यह बंदोबस्त महाराजा हरि सिंह के दौर में था।

कश्मीर के हिंदुस्तान में जम होने और जम्मू कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली दफा-370 के नाफिज होने के बाद से महाराजा के दौर का कानून पूरी तरह खत्म हो चुका है। 2004 में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने इस सिलसिले में अपना एक तारीखी फैसला देते हुए कहा था कि अगर किसी कश्मीरी लड़की की शादी दूसरी रियासत में हो जाती है तो भी उस लड़की को जम्मू कश्मीर में मिलने वाले हुकूक और इख्तेयारात खत्म नहीं होते हैं, वह पूरी तरह बरकरार रहते हैं।

वजीर-ए-आला उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी को शायद इस हकीकत का इल्म नहीं था या तकरीर करते वक्त उन्होंने जानबूझ कर झूट बोला। उमर अब्दुल्लाह के इस बयान के बाद नरेन्द्र मोदी को तो जैसे सांप सूंघ गया, वह इस मसले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए, लेकिन उनकी पार्टी की तर्जुमान निर्मला सीतारमण और लोकसभा में लीडर आफ अपोजीशन सुषमा स्वराज ने लीपापोती करते हुए कहा कि बहस कराने की बात कहने के पीछे मोदी की मंशा दरअस्ल दफा-370 खत्म करने की थी।

जम्मू कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली दफा-370 ही नहीं, अयोध्या में आलीशान राम मंदिर की तामीर और यूनिफार्म सिविल कोड जैसे हस्सास (संवेदनशील) मुद्दों पर भी नरेन्द्र मोदी अपनी पब्लिक मीटिंगों में बात नहीं करते। कानपुर और बहराइच में जब नरेन्द्र मोदी की पब्लिक मीटिंग हुई थी उस वक्त भी लोगों को उम्मीद थी कि मोदी इन मसलों पर जरूर बोलेंगे लेकिन वह इन मसलों से बचकर निकल गए। तो क्या यह समझा जाना चाहिए कि देश की सत्ता हासिल करने के लिए राम मंदिर, दफा-370 और यूनिफार्म सिविल कोड जैसे आरएसएस और बीजेपी के पुराने मुद्दे भूलने को तैयार है।

नरेन्द्र मोदी अगले साल लोक सभा इलेक्शन के बाद किसी भी कीमत पर मुल्क का वजीर-ए-आजम बनना चाहते हैं उन्हें इस बात का भी बखूबी एहसास है कि मुल्क के बीस फीसद मुसलमानों को अगल-थलग रखकर या नाराज रखकर वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सकते हैं। उन्हें यह भी मालूम है कि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद भी मुसलमान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देगा। इसलिए मोदी और उनकी पार्टी यह चाहती है कि मुसलमान उन्हें वोट दें या न दें लेकिन भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ एकजुट होकर दूसरी किसी पार्टी को वोट न करें।

आमतौर पर होता यह है कि मुस्लिम वोटर्स एकजुट होकर किसी दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के हक में चले जाते हैं। उस वक्त आमतौर पर मुसलमानों के दरमियान एक ही नारा होता है कि जो भी उम्मीदवार बीजेपी को हरा रहा हो उसी को वोट देना है। बीजेपी को हराने की हैसियत वाला उम्मीदवार कांग्रेस का हो, समाजवादी पार्टी का हो, एनसीपी का हो, आरजेडी का हो, जनता दल का हो, बहुजन समाज पार्टी का हो या किसी इलाकाई पार्टी का हो इसकी परवाह मुस्लिम वोटर नहीं करता।

नरेन्द्र मोदी और उनका पूरा आरएसएस कुनबा इस सूरतेहाल को तब्दील करना चाहते हैं इसीलिए बीजेपी के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी अपनी रैलियों में उन मुद्दों का जिक्र नहीं करते जो मुल्क के मुसलमानों को पसंद नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के सीनियर लीडर और मेनीफेस्टो कमेटी के चेयरमैंन मुरली मनोहर जोशी साफ कह चुके हैं कि उनकी पार्टी के इलेक्शन मेनीफेस्टो में राम मंदिर, यूनिफार्म सिविल कोड और कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली संविद्दान की दफा-370 जैसे मुद्दे जरूर शामिल होंगे अब जोशी कुछ कह रहे हैं और मोदी कुछ कह रहे हैं।

इससे तो यही जाहिर हो रहा है कि भारतीय जनता पार्टी इक्तेदार /सत्ता पाने के लिए जालसाजी से काम ले रही है। आईन की दफा-370 पर बहस की बात करके नरेन्द्र मोदी ने मुल्क में एक नई बहस छेड़ दी है। जम्मू कश्मीर के वजीर-ए-आला उमर अब्दुल्लाह ने उन्हें झूटा ही करार दे दिया। लेकिन उनके वालिद नेशनल कांफ्रेंस के सीनियर लीडर और मरकजी वजीर डाक्टर फारूक अब्दुल्लाह ने बहुत सख्ती के साथ कहा कि अगर दफा-370 को खत्म करने की कोशिश की गई तो जम्मू कश्मीर के रिश्ते बाकी मुल्क के साथ वैसे नहीं रह पाएंगे जैसे आज हैं। फारूक अब्दुल्लाह की बात का मतलब साफ है कि अगर दफा-370 खत्म की गई तो जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा नहीं रह सकेगा। फारूक अब्दुल्ला ने नरेन्द्र मोदी को उनकी हैसियत का एहसास कराते हुए यह भी कह दिया कि एक बार नहीं अगर वह दस बार भी मुल्क के वजीर-ए-आजम बन जाएंगे तो भी दफा-370 खत्म नहीं कर सकेंगे।

जनता दल यूनाइटेड के सदर शरद यादव ने कहा कि आरएसएस कुन्बे के लोग और नरेन्द्र मोदी फुजूल की बात करते हैं मोदी सौ जनम ले लें तब भी वह दफा-370 खत्म नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू की जिस कैबिनेट ने दफा-370 नाफिज करके जम्मू कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने का फैसला किया था उस कैबिनेट में भारतीय जनसंघ और फिर नाम तब्दील करके भारतीय जनता पार्टी के बानी (संस्थापक) डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी शामिल थे फिर यह लोग किस मुंह से दफा-370 की मुखालिफत कर रहे हैं।

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के तारिक अनवर ने कहा कि जब छः साल तक मरकज में बीजेपी की सरकार रही तो उन्होंने दफा-370 खत्म करने का फैसला क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई इलेक्शन आता है बीजेपी इसी तरह नारेबाजी करती है और इलेक्शन खत्म होते ही यह अपनी नारेबाजी भूल जाती है। समाजवादी पार्टी ने भी दफा-370 हटाए जाने की मुखालिफत की है। भारतीय जनता पार्टी के लीडरान भी इस मसले पर खामोश रहना ही बेहतर समझ रहे हैं। (हिसाम सिद्दीकी)

बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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