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ऑनर किलिंग के नाम पर पाक में 1100 औरतों व 88 मर्दों का क़त्ल : पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग

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पकिस्तान : इज्ज़त की हिफाज़त के लिये किये गये जुर्म, हिंसा के वो मामले हैं, जिन्हें परिवार के मर्द ने अपने ही परिवार की ख्वातीन के खिलाफ इसलिये अंजाम दिया है, क्योंकि उनके मुताबिक उस खातून के किसी अमल से समूचे परिवार की इज्ज़त को ठेस पहुंची है। इसका वजह कुछ भी हो सकता है जैसे कि: परिवार की तरफ से नियत शादी करने से इंकार, किसी जिश्मानी ताल्लुक का शिकार बनना, शौहर से तलाक की मांग करना या फिर गैर कानूनी ताल्लुक रखने का खदशा । सिर्फ यह धारणा ही उस खातून पर हमले को उचित ठहराने के लिये पर्याप्त है कि उसके किसी कदम से परिवार की इज्जत को बट्टा लगा है।

जुमा को साल 2015 के लिए जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि गुजिश्ता साल मुल्क में 833 औरतों को अग़वा किए जाने के मामले दर्ज हुए. 2010 में 791 मामले दर्ज किये गए थे. जबकि 2011 में पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक 720 क़त्ल किये गए. जिसमें 605 औरतें थीं और 115 मर्द. लेकिन जुर्म में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बहुत कम मामले देखे गए. सबसे ज्यादा पंजाब और सिंध रियासतों में मामले सामने आये. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस मुद्दत में 939 ख्वातीन को जिस्मानी हिंसा का शिकार बनाया गया. जबकि 777 औरतों ने ख़ुदकुशी की कोशिश की.

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पाकिस्तान में फांसी की सज़ा पर से लगी रोक हटने के बाद 47 औरतें सज़ा का इंतज़ार कर रही हैं.
हालांकि कमीशन का कहना है कि इन लोगों को सही क़ानूनी की सहलात नहीं मुहैया कराई गई.
बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाली जिंसी इस्तेहाल में साल 2015 में गुजिश्ता साल के मुक़ाबले सात फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ. जबकि मुल्क भर में जिश्मानी हिंसा के कुल 3768 मामले दर्ज हुए. जिश्मानी हिंसा का शिकार होनेवालों की उम्र 11 से 15 साल के बीच है. रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि मुल्क में रोजाना 10 बच्चों के ख़िलाफ़ जिश्मानी हिंसा का मामला दर्ज किया गया.

साभार : बीबीसी हिंदी

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