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इनके ‘दामन’ पर लग चुका है ‘दाग’, सियासी करियर में बहरान

पटना 13 जुलाई : अवामी नुमायन्दगी कानून पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानून बनाने वाले कायेदिनों और सियासी पार्टियों की बेचैनी बढ़ा दी है। रस्मी तौर से कांग्रेस, भाजपा समेत दूसरे दल भले ही इसका इस्तेकबाल करें। लेकिन, सच्चाई यह है क

पटना 13 जुलाई : अवामी नुमायन्दगी कानून पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानून बनाने वाले कायेदिनों और सियासी पार्टियों की बेचैनी बढ़ा दी है। रस्मी तौर से कांग्रेस, भाजपा समेत दूसरे दल भले ही इसका इस्तेकबाल करें। लेकिन, सच्चाई यह है कि ज़्यादातर पार्टियों के छोटे-बड़े कायेदिनों पर इसकी गाज गिर सकती है।

बिहार में कई ऐसे लीडर हैं जिन्होंने अपनी दबंगई से सियासत में एंट्री ली, लेकिन किसी ने घोटाले की वजह से तो कोई अपने मुजरिमाना किरदार की वजह से सजा पा चुका है या फिर उसके रास्ते पर है।

लालू यादव

चारा घोटाले में लालू पहले भी जेल जा चुके हैं। वहीं, हाल-फिलहाल भी इन पर तलवार लटकी हुई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के इस मामले में सीबीआई के खुसूसी अदालत को फिलहाल फैसला देने पर रोक लगा दिया है, लेकिन मुजरिम करार दिए जा चुके लालू की सियासी करियर से बहरान टला नहीं है।

राजन तिवारी

गोविंदगंज के साबिक़ असेंबली राजन तिवारी की गिनती भी बाहुबलियों में होती है। रहने वाले तो वे हैं गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के, लेकिन सियासत करते हैं बिहार में। ‘शॉर्प शूटर’ माने जाने वाले राजन पर कई हाई प्रोफाईल मर्डर के इलज़ाम हैं।

शहाबुद्दीन

बिहार में राजद के हुकूमत में साबिक़ एमपी शहाबुद्दीन खौफ का दूसरा नाम हुआ करते थे। फिलहाल वो जेल में बंद हैं। कोर्ट ने उनके इन्तेखाबात लड़ने पर भी रोक लगा दी थी। इस दौरान उनकी बीवी ने विरासत सम्हालने की कोशिश की, लेकिन जीत नसीब नहीं हो सकी। अगर जमानत पर रिहा भी होते हैं तो सुप्रीम कोर्ट के हुक्म के हिसाब से ये इलेक्शन लड़ने लायक नहीं रहेंगे, क्योंकि इन पर पहले से ही इलज़ाम साबित हो चुके हैं।

पप्पू यादव

कभी लालू के कंधे को सहारा देने वाले पप्पू यादव इन दिनों कांग्रेस का दामन थामे हुए हैं। वामपंथी असेंबली रुक्न अजीत सरकार की क़त्ल के इलज़ाम में फिलहाल ये जमानत पर जेल से बाहर हैं, लेकिन इन्हें भी इन्तेखाबात लड़ने से महरूम रहना पड़ सकता है।

सुनील पांडे

नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के बाहुबली असेंबली रुक्न सुनील पांडे भी कई दफा जेल की हवा खा चुके हैं। इन पर कई मुजरिमाना केस शेरे अल्तवा हैं। अगर अदालत ने इन्हें मुजरिम ठहरा दिया तो फिर ये सियासत से दूर होकर अपनी दबंगई के चर्चे ही लोगों को सुनाते नजर आएंगे।

सूरजभान सिंह

राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा से एमपी चुने गए सूरजभान सिंह इन दिनों जेल में बंद हैं। इन पर रामी सिंह की क़त्ल का इलजाम था। अदालत इन्हें मुजरिम ठहरा चुका है, ऐसे में ये अब इलेक्शन लड़ने के काबिल नहीं रह गए हैं।

मुन्ना शुक्ला

बिहार के साबिक़ वजीर बृजबिहारी प्रसाद की क़त्ल के मामले में अदालत ने मुन्ना शुक्ला को ता उम्र जेल की सजा सुनाई है। इन पर जिला मजिस्ट्रेट की क़त्ल के भी इलज़ाम हैं। फिलहाल, वजीर की क़त्ल के मामले में वे जेल में बंद हैं।

आनंद मोहन

साबिक़ एमपी आनंद मोहन फिलहाल गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की क़त्ल के मामले में जेल में बंद हैं। जिला मजिस्ट्रेट की क़त्ल के मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चैलेन्ज दी थी, जिसे मस्टर्ड किया जा चुका है। वे पांच सालों से जेल में बंद हैं।

रामा सिंह

बिहार के इस दबंग लीडर पर क़त्ल और इस्मतरेज़ी समेत कई मामले दर्ज हैं। रामा सिंह राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा से जुड़े रहे हैं। बिहार के महनार से लोजपा के टिकट पर इलेक्शन भी जीते। अगर इन पर इलज़ाम साबित हो जाते हैं तो ये भी इलेक्शन लड़ने लायक नहीं रहेंगे।

तस्लीमुद्दीन

कभी सीमांचल की सियासत में राजद के अगुवा और लालू के ख़ास साथी रहे तस्लीमुद्दीन आए दिन पार्टियां बदलते रहते हैं। पहले राजद फिर जदयू और अब फिर से राजद के साथ हैं। इनकी दबंगई के चर्चे भी खूब हुआ करते थे। 69 साला इस लीडर के खिलाफ क़त्ल और इस्मत रेज़ी के कई मामले दर्ज हैं। तस्लीमुद्दीन मर्क़ज में वजीर भी रह चुके हैं।

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