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इन्क़िलाबी गीतकारों का तेलंगाना तहरीक में अहम रोल

हैदराबाद ।२५ नवंबर (सियासत न्यूज़) तलंगाना तहरीक की बरक़रारी में अहम रोल अदा करने वालों में सब से अहम इन्क़िलाबी गीत और गुलूकार हैं, जिन्हों ने हसब ज़रूरत अपने नग़मों के ज़रीया तलंगाना तहरीक में एक नई जान डाल दी। तलंगाना रिसोर्स स

हैदराबाद ।२५ नवंबर (सियासत न्यूज़) तलंगाना तहरीक की बरक़रारी में अहम रोल अदा करने वालों में सब से अहम इन्क़िलाबी गीत और गुलूकार हैं, जिन्हों ने हसब ज़रूरत अपने नग़मों के ज़रीया तलंगाना तहरीक में एक नई जान डाल दी। तलंगाना रिसोर्स सैंटर की 45 वीं मुज़ाकरे अलहदा तलंगाना जद्द-ओ-जहद में नग़मों की हिस्सादारी से ख़िताब के दौरान इन्क़िलाबी गुलूकार ग़दर इन ख़्यालात का इज़हार कर रहे थी।

ग़दर ने कहा कि इमतिना आइद करने के बावजूद तलंगाना हामी इन्क़िलाबी गुलूकारों ने अपनी नग़मों के ज़रीया ना सिर्फ़ तलंगाना तहरीक को ज़िंदा रखा बल्कि तलंगाना की अवाम में एक नया जोश-ओ-वलवला पैदा करते हुए तलंगाना तहरीक को मज़बूत-ओ-मुस्तहकम किया है। उन्हों ने कहा कि इन्क़िलाबी गुलूकारों को जेल में महरूस करते हुए उन पर शिकंजे का किसने का काम भी आंधराई हुकमरानों ने किया ताकि तलंगाना तहरीक की बढ़ती मक़बूलियत और तलंगाना की अवाम में बढ़ती शऊर को ख़त्म किया जा सके मगर इन्क़िलाबी गीत जो तलंगाना का तहज़ीबी विरसा भी हैं को तशहीर को रोकने में वो नाकाम रहे हैं।

ग़दर ने कहा कि आज तलंगाना के गोशा गोशा में तलंगाना हामीयों के इन्क़िलाबी की गीतों के सबब एक ऐसा इन्क़िलाब बरपा हुआ है जिस की दुनिया में कहीं नज़र मिलेगी। उन्हों ने कहा कि अलहदा रियासत तलंगाना की जद्द-ओ-जहद को अवामी तहरीक में तबदील करने का असल सहरा इन्क़िलाबी गुलूकारों के सर जाता है जिन्हों ने अपने गीतों के ज़रीया तलंगाना की अवाम ने अंदर अलहदा तलंगाना के मुताल्लिक़ जोश-ओ-जज़बा पैदा किया।

वैद‌ कुमार ने अपने सदारती ख़िताब में तलंगाना के इन्क़िलाबी गुलूकारों के मुशतर्का इत्तिहादी (मिलाप‌)मर्कज़ के क़ियाम पर ज़ोर देते हुए कहा कि तलंगाना रिसोर्स सैंटर इस ज़िमन में पहल करते हुए मुख़्तलिफ़ सोंच-ओ-फ़िक्र के गीतकारों को एक प्लेटफार्म पर लाने का काम किया ही।

उन्हों ने कहा कि तलंगाना हामी तमाम गीतों को यकजा(एक साथ‌) करके मजमूआ की शक्ल देना भी निहायत ज़रूरी है। गड्डा अंजया, जी वेंकना, जुए राज, एन किशवर, ए वेंकना, ऐम सुरेंद्र, भिक्षा पत्ती, बाबजी, कोंडारी सैनू, वरंगल सैनू जैसे इन्क़िलाबी गुलूकारों ने इस मुज़ाकरे से ख़िताब किया। इस मौक़ा पर गड्डा अंजया के गीतों की किताब का भी रस्म इजरा इन्क़िलाबी गुलूकार ग़दर के हाथों अंजाम पाई।

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