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इन्साफ में देरी इन्साफ नहीं करने के बराबर, 1984 के दंगों की जांच के लिए सीबीआइ को आखिरी मौका

नई दिल्ली : एक स्थानीय अदालत ने सीबीआइ को साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपनी आगे की जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त दिया है। इस मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को उनकी कथित किरदार के लिए क्लीन चिट दी जा चुकी है। अदालत ने कहा कि इन्साफ में देरी इन्साफ नहीं करने के बराबर होती है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शिवाली शर्मा ने अदालत के निर्देशों के अनुसार जांच पूरी करने के लिए उचित कदम नहीं उठाने पर सीबीआइ की खिंचाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर दो महीने में कोई लाभदायक नतीजा नहीं निकला तो एजंसी के पुलिस अधीक्षक को स्पष्टीकरण देना होगा। अदालत ने यह निर्देश उस समय दिया जब सीबीआइ के अभियोजक ने जांच के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दायर की और अंतिम रिपोर्ट दायर करने के लिए दो महीने का समय और मांगा।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि मैंने सीबीआइ की स्थिति रिपोर्ट और केस फाइल पढ़ी है। रिपोर्ट और केस फाइल पढ़ने से ऐसा लगता है कि अदालत की ओर से दिए गए निर्देशोें के अनुसार जांच पूरी करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। फिर भी न्याय के हित और जांच अधिकारी के कहने पर, जांच पूरी करने के लिए दो और महीने का समय दिया जाता है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगर दो महीने बाद भी कोई लाभदायक नतीजे नहीं निकले तो सीबीआइ के संंंबंधित एसपी को हाजिर होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

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