Wednesday , September 20 2017
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इमारते शरिया के अमीर-ए-शरीअत मौलाना निजामुद्दीन का इंतकाल

पटना/फुलवारीशरीफ : इमारते शरिया के अमीर-ए-शरीअत हजरत मौलाना सैयद निजामुद्दीन साहब का सनीचर की शाम इंतकाल हो गया। वह गुजिशता कई दिनों से बीमार थे। अलमहद हाॅल में इन्होंने आखिरी सांस ली। इनकी उम्र तकरीबन 88 साल थी। इतवार को हजरत के जनाजे की नमाज इमारत शरिया के अहाते में बाद जुहर होगी।

इमारत के नाजिम मौलाना अनिसुर्रहमान कासमी ने बताया कि फुलवारीशरीफ वाकेय हाजी हरमैन कब्रिस्तान में उन को सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा। उनके जनाजे की नमाज इमारत के नायब अमीरे शरीअत हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी पढ़ायेंगे। वह अपने पीछे बीवी, तीन बेटा, छह बेटियाँ समेत पूरा अहले खाना छोड़ गये। हजरत के इंतकाल की खबर मिलते ही इमारते शरीया समेत पटना व बिहार के अलावा मुल्क के तमाम दिनी व मिल्ली अदारों में गम की लहर दौड़ गयी। ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी थे सैयद निजामुद्दीन साहब इमारते शरीयत के छठे अमीर शरीअत थे। इनकी पैदाइश 31 मार्च, 1927 को घोरीघाट में हुई थी। एक नवंबर, 1999 से इस ओहदे पर रहे। इससे पहले 1965 से लेकर 1999 तक वे इमारत शरीया के नाजिम रहे। हजरत मुल्क के सबसे बड़ी मुसलिम अदारा ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दूसरे जेनरल सेक्रेटरी थे।
उनके इंतकाल पर वजीरे आला नीतीश कुमार, वज़ीर श्याम रजक, मरकज़ी रियासती वज़ीर रामकृपाल यादव व कांग्रेस रियासती सदर अशोक चौधरी ने शोक गम का इज़हार किया।

मौलाना निजामुद्दीन साहब असल तौर से गया जिले के घोरीघाट के रहनेवाले थे। इनके वालिद का नाम काजी सैयद हुसैन था। तीन साल की उम्र में ही इन्होंने अपनी वालिदा को खो दिया। बुनयादी तालीम गांव में हुई। उसके बाद मदरसा इमदादिया, दरभंगा में दाखिला किया। उसके बाद दारुल उलूम देवबंद गये, जहां से इसलामी आला तालीम हासिल की। इन्होंने दो बार हज भी किया। ये सेंट्रल वक्फ काउंसिल के मेम्बर भी रह चुके हैं।

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