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इमारत का पता नहीं, चले पंचायत लगाने

ग्राम पंचायतों के लिए पंचायती राज महकमा का एक फरमान भारी पड़ रहा है। पंचायती राज महकमा ने तमाम जिला अफसरों को हिदायत दिया है कि पहली दिसंबर के पहले पंचायत इमारत को निशान देही कर लिया जाये।

ग्राम पंचायतों के लिए पंचायती राज महकमा का एक फरमान भारी पड़ रहा है। पंचायती राज महकमा ने तमाम जिला अफसरों को हिदायत दिया है कि पहली दिसंबर के पहले पंचायत इमारत को निशान देही कर लिया जाये।

ब्लॉक डेव्लपमेंट ऑफिसरों को इसे अमलीजामा पहनाना है। पंचायत भवन ही पंचायत दफ्तर के तौर में काम करेंगे। चंद दिनों में पंचायत दफ्तर को फंक्शनल बनाने की चैलेंज हुकूमत के सामने है। रियासत में दो-तिहाई पंचायतों में कोई सरकारी इमारत नहीं है। इधर, पंचायत दफ्तर शुरू करने की जानकारी मुंतखिब मुखियाओं को नहीं है।

महकमा ने यह भी कहा है कि पहली दिसंबर के बाद पंचायत दफ्तर से बाहर लगान काटना, बुजुर्गों के लिए पेंशन का दरख्वास्त लेना या पेंशन बांटना पंचायती राज एक्ट और सरकारी एहकमात का खिलाफ वरजी माना जायेगा। अगर कोई मुलाजिम ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

ग्राम पंचायतों में नाराजगी

हुकूमत की हिदायत को लेकर ग्राम पंचायतों में नाराजगी है। मुखिया यूनियन के सदर प्रियदर्शनी शाही ने कहा कि पंचायत दफ्तर अलग क़याम करने के सिलसिले में किसी भी मुखिया को जानकारी नहीं दी गयी है।

अगर महकमा ने अलग दफ्तर को शुरू करने की हिदायत दिया है, तो उसमें कुरसी-टेबुल वगैरह की नेज़ाम कहां से होगी। दीवार लेखन और दीगर तरह की इंतेजामत के लिए फंड कहां से आयेगा, क्या इसकी इंतेजाम मुखिया को करनी है या ब्लॉक डेव्लपमेंट ऑफिसर को। बीडीओ ने इस सिलसिले में कोई बैठक तक मुनक्कीद नहीं की है।

पंचायतों में रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, रेव्नु मुलाजिम और तरक़्क़ी साथियों की तकररूरी की गयी है। चार-पांच पंचायतों पर एक रेव्नु मुलाज़िम हैं, जो अपना अलग दफ्तर क़याम किये हैं। जिन पंचायतों में मुलाज़िम नहीं हैं, वहां पर अवामी नुमाइंदे के नहीं रहने पर कौन बैठ कर आवाम का काम करेगा। ये सब मुद्दे हैं, जिन पर फैसला लिया जाना चाहिए।

नाम-नंबर लिखना होगा

पहली नवंबर को जिला अफसरों को लेटर जारी करते हुए पंचायती राज महकमा के सेक्रेटरी अमृत लाल मीणा ने पंचायत दफ्तर भवनों को शिनाख्त करने की हिदायत दिया था। पंचायत भवन के तौर में ऐसे शिनाख्त इमारत के बाहर पंचायत का नाम, मुखिया, उपमुखिया, पंचायत सेक्रेटरी और दीगर पंचायत में काम कर रहे मुलाज़मीन के नाम और टेलीफोन नंबर दर्ज़ करना है। सेक्रेटरी ने तमाम 8,406 पंचायतों में इसे लागू कराते हुए सात दिसंबर तक रिपोर्ट भेजने की हिदायत भी जिला अफसरों को दिया है।

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