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इरान न्यूक्लीयर मसला ( समस्या) पर बहर सूरत (Whatever the case/ हर हाल में) पीछे नहीं हटेगा

तेहरान, ०३ अक्तूबर (ए एफ पी) इरान अपने न्यूक्लीयर प्रोग्राम से पीछे नहीं हटेगा हालाँकि मग़रिबी तहदेदात (पाबंदियों) के सबब मसाइल ( समस्या) दरपेश (किसी परेशानी का पेश होना) हैं जिन में इसकी करंसी की क़दर में ड्रामाई इन्हितात (कमी/ पतझड़) श

तेहरान, ०३ अक्तूबर (ए एफ पी) इरान अपने न्यूक्लीयर प्रोग्राम से पीछे नहीं हटेगा हालाँकि मग़रिबी तहदेदात (पाबंदियों) के सबब मसाइल ( समस्या) दरपेश (किसी परेशानी का पेश होना) हैं जिन में इसकी करंसी की क़दर में ड्रामाई इन्हितात (कमी/ पतझड़) शामिल है सदर महमूद अहमदी नज़ाद ने आज ये बात कही।

उन्होंने तहरान में न्यूज़ कान्फ्रेंस को बताया कि हम न्यूक्लीयर मसला (समस्या) पर पीछे हटने वाले लोग नहीं। अगर कोई ये समझता है कि वो इरान पर दबाओ डाल सकता है तो वो बेशक ग़लत है और उन्हें अपने बरताव की ज़रूर इस्लाह कर लेना चाहीए।

अहमदी नज़ाद के रिमार्कस इरान की करंसी में मुसलसल इन्हितात ( कमी) के दरमियान सामने आए हैं। इरानी करंसी गुज़श्ता एक साल के मुक़ाबिल ( मुकाबले) अपनी 80 फीसद ( %) से ज़ाइद क़दर खो चुकी है जबकि कल ही उस की क़दर में 17 फीसदी कमी आई। इरानी करंसी रियाल आज मज़ीद 4 फीसद घट कर डालर के मुक़ाबिल 36,100 पर बंद हुई एक्सचेंज पर नज़र रखने वाली वेब साईट्स से ये बात मालूम हुई ।

अहमदी नज़ाद ने कहा कि ये गिरावट मग़रिब की जानिब से इस्लामी जमहूरीया (प्रजातंत्र) के ख़िलाफ़ जारी मआशी ( आर्थिक/ माली) जंग और एक्सचेंज मार्केट के ख़िलाफ़ नफ़सियाती लड़ाई का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इरान के पास माक़ूल बैरूनी ज़र-ए-मुबादला ( आदान प्रदान के लिए इस्तेमाल होने वाले मुद्राएं) ज़ख़ाइर मौजूद हैं इन ज़ख़ाइर का तख़मीना (अनुमान/ अंदाज़ा) तेल की बरामदात में इज़ाफ़ा के सबब ( कारण) गुज़श्ता साल के ख़त्म पर तकरीबन 100 बिलियन अमेरीकी डालर लगाया गया लेकिन अमेरीकी महिकमा-ए-खज़ाना (वित्त विभाग) जो तहदेदात (पाबंदियो) की निगरानी कर रहा है इसका मानना है कि इरान की बैरूनी ( विदेशी) आमदनी मग़रिबी ( पश्चिमी) मआशी ( आर्थिक) इक़दामात ( कार्य् निष्पादन) के तहत 5 बिलियन अमेरीकी डालर माहाना घट चुकी है।

अमेरीकी महकमा-ए-ख़ारजा (वित्त विभाग) की तर्जुमान विक्टोरिया नौ लैंड ने कल वाशिंगटन में कहा था कि ये इंतिहाई सख़्त तहदेदात ( पाबंदियां) हैं जो हम अब तक बैन अल-अक़वामी ( अंतर्राष्ट्रीय) बिरादरी के तौर पर आइद ( लागू) करने में कामयाब हुए हैं और ये इरान को अपनी न्यूकलीयाई सरगर्मियों से तवज्जा (ध्यान) हटाने की कोशिश के लिए अहमियत रखती हैं।

अपनी मीडिया कान्फ्रेंस में अहमदी नज़ाद ने इन इशारों से अमलन ( अमल के तौर पर) दसतबरदारी ( किसी काम को करने से हट जाना या छोड़ देना) इख़तियार कर ली जो उन्होंने गुज़श्ता हफ़्ता न्यूयॉर्क को अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ( संयुक़्त राष्ट्र/ UN) जनरल असेंबली में शिरकत के सिलसिला में अपने दौरा में दीए थे कि इरान न्यूक्लीयर मसला पर अमेरीका के साथ रास्त मुज़ाकरात ( सीधे आपसी बातचीत) पर ग़ौर कर सकता है ।

उन्होंने कहा था कि रास्त मुज़ाकरात (सीधे आपसी बातचीत) मुम्किन है लेकिन शराइत ( शर्तें) दरकार ( वांछित) है और मैं नहीं समझता कि बात चीत के लिए कोई शराइत ( शर्त) मौजूद है। बात चीत मुंसिफ़ाना (न्यायपूर्वक) तौर पर और बाहमी एहतिराम के साथ होनी चाहीए। लेकिन उन्होंने ये भी कहा था कि इनके ख़्याल में मौजूदा सूरत‍ ए‍ हाल ( वर्तमान हालात) इरान और अमेरीका के दरमियान ताल्लुक़ात में देरपा नहीं हो सकती।

अहमदी नज़ाद को वतन वापसी पर इरान में कट्टर पसंदों ने तन्क़ीद ( टिप्पणी/ समीक्षा) का निशाना बनाया कि उन्होंने अमेरीका के साथ मुज़ाकरात ( आपसी बातचीत) की राह खोल दी है। इसके साथ ये तन्क़ीदें भी हुई कि इन की हुकूमत मईशत ( आर्थिक स्थिती) को बदइंतिज़ामी से चला रही है ।

तेहरान के चैंबर आफ़ कॉमर्स के सदर नशीन यहया अल असहाक़ के हवाला से महर न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि इस बोहरान ( संकट/ परेशानी ) की वजूहात ( वजहों) में तहदेदात ( पाबंदी) नुमायां हैं लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वो शख़्स जो बोहरान ( संकट/ परेशानी) के वक़्त हुस्ने ( अच्छा) इंतिज़ाम से क़ासिर ( असमर्थ) है उसे अपने ओहदा ( पद) पर बरक़रार नहीं रहना चाहीए

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