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इराक़ पर हमला,गैर दुरुस्त फैसला, अमेरीका का एतराफ़

वाशिंगटन, 20 मार्च: (पी टी आई) सदर अमेरीका बारक ओबामा को अब भी यक़ीन है कि इराक़ पर हमला दानिशमंदाना फैसला नहीं था, हालाँकि वो इस बात से इत्तिफ़ाक़ करते हैं कि अमेरीकी फ़ौज की कुर्बानियों की वजह से इराक़ आज एक बेहतर मुक़ाम है। 10 साल क़ब्ल अम

वाशिंगटन, 20 मार्च: (पी टी आई) सदर अमेरीका बारक ओबामा को अब भी यक़ीन है कि इराक़ पर हमला दानिशमंदाना फैसला नहीं था, हालाँकि वो इस बात से इत्तिफ़ाक़ करते हैं कि अमेरीकी फ़ौज की कुर्बानियों की वजह से इराक़ आज एक बेहतर मुक़ाम है। 10 साल क़ब्ल अमेरीका ने कीमीयाई और हयातयाती हथियारों की तलाश में इराक़ पर हमला किया था, ओबामा ने उस वक़्त इराक़ पर हमला की मुख़ालिफ़त की थी और इराक़ में अमेरीकी फ़ौज की तैनाती ख़त्म कर देने का तयक्कुन देते हुए सदारती इंतेख़ाबात में हिस्सा लिया था।

2011 में इराक़ से अमेरीकी फ़ौजियों के आख़िरी जत्थे ने तख़लिया कर दिया। व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी जय कारिणी ने रोज़ाना प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि इराक़ पर 10 साल क़ब्ल हमला के बारे में सदर बारक ओबामा का मौक़िफ़ बिलकुल वाज़िह है, उन्हें यक़ीन है कि ये कोई दुरुस्त फैसला नहीं था।

वो उस वक़्त भी इस पर यक़ीन नहीं रखते थे और उनका मौक़िफ़ आज भी तब्दील नहीं हुआ है । उन्होंने कहा कि अमेरीकी फ़ौजी मर्द-ओ-ख़वातीन दुनिया की बेहतरीन माहिर फ़ौज है, जब उन्हें कोई मुहिम सुपुर्द की जाती है तो चाहे ये फैसला दुरुस्त हो या ग़लत वो उसकी तकमील करना अपना मक़सद समझते हैं और माहिराना अंदाज़ में उसकी तकमील करते हैं।

इराक़ और अफ़्ग़ानिस्तान के सिलसिले में भी यही किया गया है। यही वजह है कि आज इराक़ एक बेहतर मुक़ाम है और एक बेहतर मुस्तक़बिल इसका मुंतज़िर है। अमेरीकी मर्द-ओ-ख़वातीन की क़ुर्बानियां ज़ाए नहीं हुई हैं।

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