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इराक़ में अमरीकी फौजियों को पेचीदा चैलेंजों का सामना

अमरीकी ख़ुसूसी अफ़्वाज को जो इराक़ में तीन साल के वक़्फ़े से तैनात की गई हैं, पेचीदा चैलेंजों का सामना है। उन्हें इराक़ी फ़ौज की मदद करना है और अस्करीयत पसंदों से जंग की उन की सलाहीयत बेहतर बनाना है। फ़ौज के ग्रीन बैरेट्स जो कई बरसों से

अमरीकी ख़ुसूसी अफ़्वाज को जो इराक़ में तीन साल के वक़्फ़े से तैनात की गई हैं, पेचीदा चैलेंजों का सामना है। उन्हें इराक़ी फ़ौज की मदद करना है और अस्करीयत पसंदों से जंग की उन की सलाहीयत बेहतर बनाना है। फ़ौज के ग्रीन बैरेट्स जो कई बरसों से अपने काम के एक बुनियादी हिस्से के तौर पर दीगर ममालिक की अफ़्वाज को तर्बीयत देने और हालात का अंदाज़ा लगाने का काम कर रहे हैं।

इराक़ में तैनाती के लिए मुंतख़ब किए गए हैं, लेकिन उन लोगों को इराक़ में जो फ़राइज़ अंजाम देने होंगे। उन से वो बख़ूबी वाक़िफ़ हैं। ये एक पेचीदा कार्रवाई होगी। इराक़ी फ़ौज के हौसलों की पस्ती दूर करनी होगी जो अस्करीयत पसंदों की पेशरफ़्त की वजह से पैदा हो गए हैं।

माहिरीन ने तजवीज़ पेश की है कि आला सतही कमांडोज़ फ़ौरी तौर पर इराक़ी फ़ौज के इन्हितात को रोक सकेंगे, ताहम उन्हें इस के लिए वसीअतर कोशिश करनी होगी और गहरे फ़िर्कावाराना इख़्तिलाफ़ात को दूर करना होगा ताकि ज़्यादा माहिर फ़ौजी क़ियादत तैयार की जा सके।

अमरीका और इराक़ ने कल एक अहम मुआहिदा पर दस्तख़त किए हैं जिस के तहत इराक़ में तैनात 300 ख़ुसूसी कार्रवाई करने वाले अमरीकी कमांडोज़ की फ़ौज को क़ानूनी तहफ़्फ़ुज़ हासिल होगा।

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