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इरोम शर्मीला के ख़िलाफ़ इक़दाम ख़ुदकुशी का मुआमला दर्ज

नई दिल्ली 5 मार्च : दिल्ली की एक अदालत ने इरोम शर्मीला के ख़िलाफ़ मुआमलात दर्ज किए हैं जो मुतनाज़ा AFSPA की बर्ख़ास्तगी केलिए गुजिशता 12 सालों से भूक हड़ताल पर हैं । अदालत ने उन पर 2006-ए-में मौत होजाने तक भूक हड़ताल करने का एक मुआमला दर्ज करते हुए उसे इक़दाम ख़ुदकुशी से ताबीर किया ।

मेट्रो पोलटीन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने 40 साला इरोम शर्मीला के ख़िलाफ़ इल्ज़ामात ब्यान‌ किए लेकिन यरोम शर्मीला ने इन इल्ज़ामात की ये कह कर तरदीद की कि इनका एहतिजाज तशद्दुद से पाक था और अब भी है । मुक़द्दमा को जारी रखते हुए अदालत ने अब 22 मई को गवाह‌ के बयानात कलमबंद करने की तारीख़ मुक़र्रर की है जिस का ताल्लुक़ इरोम शर्मीला इस भूक हड़ताल से है जो उन्हों ने 4 अक्टूबर 2006-ए-में दिल्ली के जंतर मंत्र पर शुरू की थी ।

वो एक अर्सा से माँग‌ करती आरही हैं कि आर्म्ड फोर्सेस स्पैशल पावर्स ऐक्ट (AFSPA) मुसल्लह अफ़्वाज को ख़ुसूसी इख़्तयारात दिए जाने की कट्टर मुख़ालिफ़ हैं और फ़ौरी तौर पर इस से दस्तबरदार होने का मुतालिबा एक अर्सा से जारी है लेकिन हुकूमत के कानों पर अब तक जूं नहीं रेंगी है ।

याद रहे कि जम्मू-ओ-कश्मीर में भी एक अर्सा से AFSPA की बर्ख़ास्तगी का मुतालिबा किया जा रहा है क्योंकि मुतनाज़ा ऐक्ट का सेक्योरिटी अफ़्वाज नाजायज़ फ़ायदा उठा रही है, जिस से अव्वाम को राहत की बजाय मुश्किलात का सामना है । इस्मत रेज़ि के उसे कई वाक़ियात हैं जहां सेक्योरिटी अफ़्वाज के अहलकार मुलव्वस हैं । इस क़ानून की बर्ख़ास्तगी वक़्त की अहम ज़रूरत है ।

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