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इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनीकेशन के माज़ूर इंजीनियर की अमेरीका में बेहतर ख़िदमात

हैदराबाद 29 जुलाई :सियासत और फै़जे आम ट्रस्ट के तआवुन-ओ-इश्तिराक से इंजीनियर मुहम्मद यूसुफ़ ( हाल मुक़ीम अमेरीका ) की तहनीती तक़रीब दफ़्तर फै़जे आम ट्रस्ट, बाबूख़ां स्टेट बशीरबाग़ मुनाक़िद हुई।

जिसमें शहर की ज़ी असर शख़्सियात मर्द-ओ-ख़वातीन शरीक थे। सदारत डॉ शमशाद हुसैन चैरमैन ट्रस्ट ने की। मुहम्मद यूसुफ़ जो बज़ाहिर जिस्मानी माज़ूर हैं लेकिन उन्होंने अपनी इस माज़ूरी को बालाए ताक़ रखकर मेहनत-ओ-लगन के ज़रीये इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनीकेशन इंजीनीयरिंग साल 1988 में अव्वल दर्जा से कामयाबी हासिल की और अपना मुक़ाम बनाते हुए अमेरीका में इन दिनों बरसर रोज़गार हैं और वो अपनी सलाहीयतों के ज़रीये इस काबिल हो चुके हैं कि दूसरों की माली मदद करसके।इस तक़रीब में इंजीनियर मुहम्मद यूसुफ़ से शुरका ने मुलाक़ात की और उन्हें मुबारकबाद दीए।ज़हीरुद्दीन अली ख़ां मैनेजिंग एडिटर रोज़नामा सियासत ने मुहम्मद यूसुफ़ की सलाहीयतों को सराहा और मुबारकबाद दी कि वो माज़ूर होने के बावजूद अपने मक़सद को पालिया अगर मुहम्मद यूसुफ़ जैसे फ़आल और हुनर-मंद नौजवान-ओ-अफ़राद मुआशरे को मिल जाएं तो ये मुआशरा हर नहज पर तरक़्क़ी करते हुए एक मिसाली मुक़ाम दुनिया में पैदा करसकेगा।

उन्होंने मुहम्मद यूसुफ़ को मौजूदा नई नसल के लिए एक मिसाली क़रार दिया। इफ़्तिख़ार हुसैन सेक्रेटरी ट्रस्ट ने मुहम्मद यूसुफ़ और शुरका का ख़ैर-मक़्दम किया और मुहम्मद यूसुफ़ की तालीमी सलाहीयत-ओ-क़ाबिलीयत की सराहना की और कहा कि वो जिस्मानी तौर पर माज़ूर हैं उस के बावजूद बड़ी ख़ामोशी के साथ उनकी जद्द-ओ-जहद और आला तालीम और रोज़गार का हासिल करना और इस से दूसरों को नफ़ा बख़श बनना बड़ा एहमीयत का हामिल है।

इफ़्तिख़ार हुसैन ने फाउंडेशन की तरफ से जो तआवुन मुहम्मद यूसुफ़ का किया गया उस की तफ़सील पेश की। इस मौके पर ज़हीरुद्दीन अली ख़ां के हाथों मुहम्मद यूसुफ़ को गुलदस्ता पेश किया गया। इंजीनियर मुहम्मद यूसुफ़ ने फाउंडेशन के तआवुन-ओ-इश्तिराक का शुक्रिया अदा किया जब कि उनकी एसे वक़्त मदद की जिन घड़ीयों को हमेशा अपने ज़हन में ताज़ा रखे हुए हैं।

उन्होंने दौरान इंजीनीयरिंग तालीम जिन तकालीफ़ से गुज़रना पड़ा वो बयान किया और कहा कि इंजीनीयरिंग की पढ़ाई तकमील के बाद बैरूनी मुल्क का रुख करना पड़ा जिसके लिए उन्होंने ऐलान किया कि जिस्मानी माज़ूरीन जो छोटा कारोबार करने के ख़ाहां हैं वो एकूल अबुल फाउंडेशन यूएसए ग्रांट्स के लिए अपनी दरख़ास्तें दे सकते हैं। जिसके ज़रीये एक हज़ार लोगों को कोई छोटा कारोबार शुरू करने में मदद की जाएगी और जो लोग कमज़ोर हैं उनकी क़ाबिलीयत-ओ-सलाहीयत के एतबार से कारोबार में मदद की जाएगी। और फाउंडेशन के साथ फै़जे आम ट्रस्ट का भी तआवुन शामिल रहेगा। डॉ शौकत अली मिर्ज़ा हेल्पिंग हैंड्स ने मुहम्मद यूसुफ़ की कोशिशों की सराहना की और कहा कि सियासत के तआवुन-ओ-इश्तिराक से फै़जे आम ट्रस्ट , हेल्पिंग हैंड्स फ़लाही काम में कोई कसर बाक़ी नहीं रख रहे हैं।

उन्होंने मुहम्मद यूसुफ़ की जुरात मंदी की तारीफ़ की। समी उल्लाह ख़ां ने कहा कि पैरा मेडिकल कोर्स में जिस तरह ज़हीरुद्दीन अली ख़ां और इफ़्तिख़ार हुसैन का तआवुन है वो मिसाली है। जिसके ज़रीये कई तलबा-ए-ओ- तालिबात ने इस कोर्स के ज़रीये अपने रोज़गार को मुस्तहकम किया। उन्होंने माज़ूर लोग जो जिस्मानी तौर पर माज़ूर नज़र आते हैं लेकिन अल्लाह उनमें एसी सलाहीयतें पैदा कर दी हैं एक अच्छा ख़ास्सा इन्सान कर नहीं सकता। माज़ूर लड़की राफिया बेगम से इंजीनियर मुहम्मद यूसुफ़ की मुलाक़ात करवाई गई। इस मौके पर ग़ुलाम यज़्दानी एडवोकेट, जस्टिस ई इस्माईल, अनवर ख़ां , क़ासी जैन उल अबिदीन , एम डी ख़ां , अय्यूब अली ख़ां और दुसरें की कसीर तादाद मौजूद थी। रिज़वान हैदर ट्रस्टी ने शुक्रिया अदा किया।

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