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इसराफ़-ओ-ग़ैर इस्लामी फ़िक्र-ओ-अमल के सबब मिल्लत को नुक़्सान

हैदराबाद 05 सितम्बर:ज़ाहिद अली ख़ान एडिटर सियासत ने कहा कि हैदराबाद और अज़ला में दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम के ज़रीये सैंकड़ों की तादाद में शादियां तए पाई हैं और आज टोली चौकी में 65 वां दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम हो रहा है। इन प्रोग्रामों को मुनाक़िद करने का मक़सद मुस्लिम वालिदैन के सोनच और फ़िक्र में ना सिर्फ तबदीली लाना है बल्के शादीयों को आसान बनाने मिल्लत-ए-इस्लामीया के शऊर को बेदार करना भी है।

ज़ाहिद अली ख़ान एस ए इमपिरिय‌ल गार्डन टोली चौकी में 65 वें दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम में सदारती तक़रीर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक सर्वे किया गया जिसमें इस तल्ख़ हक़ीक़त का इन्किशाफ़ किया गया कि एक मुस्लिम शादी पर चार ता छः करोड़ रुपए के मसारिफ़ हुए हैं और अब तक जितनी शादियां अंजाम पाई हैं उन पर चार हज़ार करोड़ रुपए से ज़ाइद मसारिफ़ हुए हैं। ये हैदराबाद के मुस्लिम मुआशरे के लिए शर्मनाक है। उन्होंने मुसलमानों को तलक़ीन की के वो मामूली पैमाने पर शादी और वलीमे की तक़ारीब का एहतेमाम करें।

इस्लामी तरीक़े पर तक़ारीब हूँ। ग़ैर इस्लामी रसूमात से गुरेज़ करें। उन्होंने कहा कि शादीयों में इसराफ़ से क़ौम के अख़लाक़-ओ-मईशत तबाह हो रही है। मुख़्तलिफ़ गोशों से इसरार के बावजूद हम फुज़ूलखर्ची से बाज़ नहीं आते। लड़कीयों के इंतेख़ाब में भी हमारा अंदाज़ फ़िक्र और तर्ज़-ए-अमल ग़ैर इस्लामी और ग़ैर अख़लाक़ी है। गोरे रंग को ख़ूबसूरती का मयार बना कर हम अपनी औलाद के साथ ज़्यादती कर रहे हैं जब तक हम मौजूदा हालात में तबदीली नहीं लाएँगे उस वक़्त तक हमारे मसाइल यूँही पेचीदा और मुश्किल तरीन होते जाऐंगे।

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि इस प्रोग्राम में अमेरीका सऊदी अरब से हमारे मेहमान शरीक हैं और उन की भी ख़ाहिश है कि इस नौईयत का प्रोग्राम बैरूनी मुल्कों खास्कर अमेरीका में भी हो। जहां मुस्लमान पयामात तए ना होने पर परेशान हैं। उन्होंने सदर फ़ैडरेशन आफ़ टोली चौकी कॉलोनीज़ मुहम्मद मुईनुद्दीन को ख़िराज-ए-तहिसीन पेश किया और कहा कि उन्होंने ना सिर्फ शादी ख़ाना मुफ़्त फ़राहम किया बल्के दु बा दु मुलाक़ात के एहतेमाम में हिस्सा लिया। मुहम्मद मुईनुद्दीन ने कहा कि दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम से बे-जा रसूमात का इंसिदाद किया जा रहा है और फ़र्सूदा रसूमात से गुरेज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ज़ाहिद अली ख़ान की एक खाना और एक मीठा तहरीक निहायत बेहतर और कारा॓मद है। अमेरीका से आई मेहमान प्रवीण मुहम्मद ने कहा कि तालीम से मुआशरे की बुराईयों को दूर किया जा सकता है। वो ख़ुद हैदराबादी हैं लेकिन उन्हें अफ़सोस है कि हैदराबाद में मुस्लिम शादियां कई मसाइल से दो-चार हैं। उन्होंने कहा कि ज़ाहिद अली ख़ान मुआशरे की बुराईयों को दूर करने-ओ-मिल्लत के मसाइल को हल करने मसरूफ़ हैं।

उन्होंने कहा कि हम अपनी तहज़ीब से दूर होते जा रहे हैं जबकि हमारी फ़लाह-ओ-बहबूद का इन्हिसार इस्लामी तहज़ीब-ओ-तमद्दुन को इख़तियार करने में है। अमेरीना क़ैसर मुक़ीम सऊदी अरब ने कहा कि वो लड़कीयों के मसाइल और खासतौर पर शादी से मुताल्लिक़ उमूर पर तहक़ीक़ का काम कर रही हैं। उन्होंने मुसलमानों पर-ज़ोर दिया कि वो सादा ज़िंदगी गुज़ारें और शादीयों में सादगी इख़तियार करें। हिंदों की शादी मंदिर में और ईसाईयों की चर्च में हुआ करती है। लेकिन मुस्लमान शादी ख़ानों में शादी को क्युं तर्जीह देते हैं। हमें अंदाज़ बदलना चाहीए। उन्होंने कहा कि ज़ाहिद अली ख़ान को ना सिर्फ अदब-ओ-सहाफ़त विरसा में मिली है बल्के क़ौमी-ओ-मिली ख़िदमात का जज़बा भी उन्हें अपने ख़ानदान से हासिल हुआ है।

दु बा दु मुलाक़ात में 20 वालेंटरस ने वालिदैन की रहनुमाई की। रजिस्ट्रेशन का आग़ाज़ 10 बजे दिन से हुआ। लड़कीयों के 305 और लड़कों के 105 नए रजिस्ट्रेशन करवाए गए।

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