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इस्तिग़ासा के मुनहरिफ़ गवाह को तीन माह क़ैद की सज़ा

थाने, ०५ जनवरी: ( पी टी आई ) इस्तिग़ासा के गवाह और भीवनडी के बदनाम-ए-ज़माना क़तल केस के असल शिकायत कनुंदा को जिस ने मुनहरिफ़ होकर इस्तिग़ासा की मदद से इनकार कर दिया , एक मुक़ामी अदालत ने तीन माह क़ैद की सज़ा सुनाई है ।

थाने, ०५ जनवरी: ( पी टी आई ) इस्तिग़ासा के गवाह और भीवनडी के बदनाम-ए-ज़माना क़तल केस के असल शिकायत कनुंदा को जिस ने मुनहरिफ़ होकर इस्तिग़ासा की मदद से इनकार कर दिया , एक मुक़ामी अदालत ने तीन माह क़ैद की सज़ा सुनाई है ।

थाने एडीशनल सेशन्स जज आई बी शेख़ ने एक क़त्ल केस में 11 अगस्त 2011 को 12 अफ़राद बिशमोल एक मौजूदा कार्पोरेटर भीवनडी निज़ाम पर म्यूनसिंपल कारपोरेशन सलीम क़ुरैशी को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी ।

इस्तिग़ासा के बमूजब मुल्ज़िमीन ने जिन में अक्सर मटन शाप के मालकीयन हैं , 28 मई 2007 को 20 साला अक़ील शब्बीर क़ुरैशी पर अस्तूरों से हमला किया था जिस के नतीजे में अक़ील दवाख़ाना लेजाने के दौरान जांबर ना हो सका ।

इस का दोस्त फ़िरोज़ जमन चौधरी तब इस के हमराह था जब ये वाक़िया पेश आया । एडीशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हेम लता देशमुख जिन्हों ने ये ट्रायल मुनाक़िद किया , उन्हों ने अदालत को बताया कि इस्तिग़ासा का गवाह फ़िरोज़ मुनहरिफ़ होगया और ये भी कहा कि इस पर झूटी क़सम खाने का मुक़द्दमा चलाना चाहीए ।

अदालत ने इस मसले का अज़खु़द नोट लिया और गवाह को तलब किया और मुआमले की समाअत के बाद उसे सज़ा सुनाई ।

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