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इस्लामिक बुक फेयर, नायाब कुतुब का ज़ख़ीरा, अवाम के तास्सुरात

इल्म अंबिया का विर्सा है, क़ौमों के उरूज और ज़वाल में इल्म की अहमियत एक मुस्लिमा हैसियत है। तालीम एक ऐ नूर है जिस पर अमल से ज़िंदगी पुरनूर और आख़िरत में कामयाबी मिलती है। किताबें तन्हाई की दोस्त और ज़िंदगी की वीरानी को ख़त्म करने का बेहतरीन ज़रीया हैं।

इंटरनेशनल इस्लामिक बुक फेयर से लोगों की जुस्तजू और यहां आमद पर सोंचने पर मजबूर कर दिया। मुख़्तलिफ़ मौज़ूआत पर इस्लामी लिट्रेचर मौजूद है। यहां इस्लामी तहज़ीब का ना सिर्फ़ ग़लबा है बल्कि इस तहज़ीब आम लोगों को भी मुतास्सिर कर देगा।

इंटरनेशनल इस्लामिक बुक फेयर में दुनिया भर से इस्लामी मौज़ूआत पर मुख़्तलिफ़ मालूमात किताबों की फ़राहमी ना सिर्फ़ उर्दू बल्कि अंग्रेज़ी और अर्बी में बिलख़ुसूस बेरूत, इरान, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे ममालिक से उस की फ़राहमी के लिए इंतेज़ामात क़ाबिले मुबारकबाद हैं।

एक विज़ीटर जनाब वज़ीर ख़ान ने अपने तास्सुर में ये इज़हार किया कि एक ही छत तले इतने सारे मौज़ूआत पर किताबों को देख कर ख़ुशी और हैरत हुई। शुर्काए ने शहरियाने हैदराबाद से गुज़ारिश की कि वो इस कीमती असासे से इस्तिफ़ादा फ़रमाएं।

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