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इस्लामिक बैंकिंग भारतीय संदर्भ में अधिक मददगार साबित नहीं होगा

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस्लामिक बैंकिंग भारतीय संदर्भ में अधिक मददगार साबित नहीं होगा। भारत सरकार ने पहले से इस्लामिक बैंकिंग को जन धन योजना और सर्व सुरक्षा बीमा योजना के साथ जोड़ने की योजनी चला रखी है।

लोकसभा में 9 दिसम्बर को लिखित जवाब देते हुए राज्य वित्तमंत्री ने संतोष गंगवार ने कहा कि इस्लामिक बैंकिंग शुरू करने के लिए बहुत सारे कानूनी तब्दीलियां करने होगी और असंभव-सा है। उन्होंने यह वक्तव्य रिज़र्व बैंक द्वारा बनाई गई कमिटी में भी कही। गौरतलब है कि इस साल मई महीने में इस्लामिक बैंकिंग को स्वीकृति दे दिया गया था। उसके बाद रिज़र्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस्लामिक बैंकिंग ब्याज रहित बैंकिंग है। इससे अंतर-विभागीय वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और विशाल बाजार की क्षमता का विकास होगा।

इससे पहले रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने इस्लामिक बैंकिंग का विरोध किया था और इसको लेकर शुरूआती कानूनी पेचिदगियों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत में इस्लामिक बैंकिंग का कंसेप्ट संभव नहीं है। हालांकि स्वराज्य संपादकीय निदेशक आर जगन्नाथन ने कुछ दिन पहले बताया था कि किसी भी बैंकिंग सिस्टम को में चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य धार्मिक विचारों का प्रसार करना नहीं है।

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