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इस्लामी फ़ैनानस , क़बज़ा करो एहतिजाज और इंसाफ़ पसंद निज़ाम का मुतालिबा

इस्लामी फ़ैनानस का निचोड़ ये है कि नुक़्सान और मुंतक़ली के ख़तरे में शराकतदारी कियौं कि इस के माली और मआशी निज़ाम में तहदिदात और तवाज़ुन दोनों मौजूद हैं । ये निज़ाम इक़दार पर मबनी मआशी निज़ाम है जो हक़ीक़ी मईशत को अख़लाक़ और इक़

इस्लामी फ़ैनानस का निचोड़ ये है कि नुक़्सान और मुंतक़ली के ख़तरे में शराकतदारी कियौं कि इस के माली और मआशी निज़ाम में तहदिदात और तवाज़ुन दोनों मौजूद हैं । ये निज़ाम इक़दार पर मबनी मआशी निज़ाम है जो हक़ीक़ी मईशत को अख़लाक़ और इक़दार से मरबूत करता है । ये उसे मुआहिदे करता है जिन की बुनियाद शफ़्फ़ाफ़ियत और ग़ैर मुनज़्ज़म मालूमात को अक़ल्ल तरीन हद तक पहुंचा देना है ताकि कमज़ोर तर तबक़ात के इस्तिहसाल का इंसिदाद किया जा सके। अलावा अज़ींइस्लामी फ़ैनानस दौलत और आमदनी की तक़सीम और मआशी मवाक़े यक़ीनी बनाने परमबनी है ।

गोया इस्लामी फ़ैनानस का निज़ाम उसे कारोबार के बारे में है जो इंसाफ़ और शफ़्फ़ाफ़ियत की बुनियाद पर हो । आम तसव्वुर के बरअक्स ये कोई मज़हबी नज़रिया नहीं है । मौजूदा दौर के मआशी निज़ाम की वजह से वाल स्टरीट पर क़बज़ा करो एहतिजाजजिस का 17 सितंबर से आग़ाज़ हुआ था हनूज़ जारी है । ये एहतिजाज समाजी और मआशी अदम मुसावात , बेरोज़गारी में इंतिहाई इज़ाफ़ा , हिर्स और कुरप्शन में इज़ाफ़ा , बाहमी तआवुन पर गैरज़रूरी असर-ओ-रसूख़ का इस्तिमाल और ख़ास तौर पर मआशी ख़िदमात के शोबे पर नाजायज़ असर-ओ-रसूख़ और हुकूमत को मजबूर करदेने के ख़िलाफ़एहतिजाज है ।

एहितजाजियों का नारा है 99 फ़ीसद ममालिक में दौलत और आमदनी के एतबार से अदम मुसावात पैदा होती जा रही है । अमरीका में मालदार तरीन और गरीबतरीन अफ़राद के दरमियान ख़लीज 99 फ़ीसद पाई जाती है । यानी 1 फीसद अफ़राद मालदार तरीन और 99 फ़ीसद अवाम गरीब तरीन हैं। मौजूदा एहतिजाज से कई अंदेशे पैदा होगए हैं । अरब ममालिक में भी इन्क़िलाब की लहर चल रही है जो कुरपट और जाबिर हुकूमतों को तब्दील कर देना चाहती है । तीवनस , मिस्र , लीबिया और अब यमन और शाम में भी नई हुकूमतों के अनक़रीब क़ियाम का इमकान है । इन तमाम इन्क़िलाबों की बुनियाद इस्लामी मआशी निज़ाम से दूरी है ।

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