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इस्लाम ने मेरे क़ल्ब को नूर और ज़िंदगी को सुकून बख्शा

हैदराबाद १६ मई : ( रास्त ) : इस्लाम एक आलमगीर और इन्क़िलाबी मज़हब है इस से ना सिर्फ मुस्लमान बल्कि पूरी दुनिया ने इस्तिफ़ादा क्या ये एक बेदाग़ सच्चाई है कि अगर इस्लाम जलवागर ना होता तो इंसानी मुआशरा की सही इस्लाह और तरक़्क़ी क़तई मुम

हैदराबाद १६ मई : ( रास्त ) : इस्लाम एक आलमगीर और इन्क़िलाबी मज़हब है इस से ना सिर्फ मुस्लमान बल्कि पूरी दुनिया ने इस्तिफ़ादा क्या ये एक बेदाग़ सच्चाई है कि अगर इस्लाम जलवागर ना होता तो इंसानी मुआशरा की सही इस्लाह और तरक़्क़ी क़तई मुम्किन ना थी और ये दुनिया हमेशा जहालत और तारीकी में मुबतला रहती जैनिट फ़ोकज़ी राफ़ट जो यू के की शहरी और एक मल्टीनेशनल कंपनी की ब्रांच डायरैक्टर हैं ने आज मुदर्रिसा बाब अलालम अनवार मुहम्मदी पुलिस कॉलोनी बहादुर पूरा के मुआइना के दौरान इन ख़्यालात का इज़हार किया ।

मौलाना सय्यद इसहाक़ मुही उद्दीन कादरी बानी-ओ-नाज़िम ने मुदर्रिसा का तफ़सीली दौरा करवाया । जैनिट फ़ोकज़ी राफ़ट ने इस्लामी तालीमात का गहराई से मुताला किया और इस्लाम ने औरतों के हुक़ूक़ और यहां तक कि जानवरों के हुक़ूक़ जो बतलाए हैं इस से मुतास्सिर हो कर इस्लाम क़बूल कर लिया है इसी असना उन्हों ने कहा कि इस्लाम ने मेरे क़लब को नूर और ज़िंदगी को सुकून बख्शा है जिस की वजह से मैं इस्लाम के दामन में आगई ।

जैनिट फ़ोकज़ी ने मौलाना इसहाक़ मुही उद्दीन कादरी से कहा आप मुझे ख़दीजा कह कर पकारें उन के कहने पर मौलाना ने सवाल क्या ये नाम आप को कैसे मालूम ? जैनिट ने कहा इस्लाम की तालीमात का जब मैंने मुताला किया तो मालूम हुआ कि औरतों में सब से पहले इस्लाम क़बूल करनेवाली मुक़द्दस ख़ातून ख़दीजा हैं ।

इस लिए मेरी ख़ाहिश है कि मेरा नाम भी ख़दीजा रखा जाय चुनांचे मौलाना ने ख़दीजा से मुख़ातब होने पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए कहा कि आप ने मुझे कलिमा तो पढ़ाया सिखाया है मगर इस इदारा में मैंने देखा कि तलबा क़ुरआन की तिलावत में ऐसा मसरूफ़ हैं कि मुझे ऐसा महसूस हो रहा है तिलावत क़ुरआन में वो इतने मुनहमिक हैं कि दुनिया का उन को कोई ख़्याल ही नहीं ।

सिर्फ याद इलहा में मस्त हैं मैं चाहती हूँ कि इस तरह क़ुरआन की तिलावत से लुतफ़ अंदोज़ हूँ और अल्लाह की ख़ुशी हासिल करलूं तो मौलाना इसहाक़ ने अंग्रेज़ी आलम से तआरुफ़ करवाया और उन से ज़रूरी दीनी तालीम हासिल करने का इंतिज़ाम किया । इस मौक़ा पर मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद आसिफ़ इर्फ़ान कादरी मौजूद थे ।।

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