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इस्लाम में गो हत्या वर्जित है,भगवा व चिश्ती रंग की अहमियत है: गौ-कथा वाचक फैज़ खान

बेमेतरा/थानखम्हरिया. तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें, मुत्तहिदा सर्विस व गो-सेवा के लिए वक्फ गो-कथा वाचक मोहम्मद फैज़ खान के इन्ही लफ़्ज़ों के साथ शुक्रवार को श्री साईनाथ फाउंडेशन और गैंग ऑफ डफर्स के अकवामे सरपरस्ती में मुनाकिद ऐतिहासिक 3 योमी गो-कथा व योग कैंप का इनकाद हुआ।  साईनाथ पब्लिक स्कूल प्रांगण, थानखम्हरिया में 16, 17 व 18 फरवरी को मोसिकी गौ-कथा व योग कैंप का का इनकाद किया गया। अपने भाषण में गो-कथा वाचक मोहम्मद फैज़ खान ने हिन्दूत्व को सिर्फ एक मज़हब ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति बताया, साथ ही उन्होंने इस्लाम में गो हत्या को मामनू बताते हुए ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को भारत में इस्लाम का बानी बताया।

इस्लाम में भगवा चिश्ती रंग भगवा रंग के अहमियत को बताते हुए उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ की दरगाह के मुख्य दीवान सर से पांव तक भगवा रंग का ही कपडे धारण करते हैं, और वहां के देग (खाना बन्ने वाला) में गोश्त खोरी पर पूरी तरह पाबन्दी है।भोज में सिर्फ केशरिया रंग की मीठा चावल ही बनाया जाता है। इस्लाम में भगवा रंग को दरअसल चिश्ती रंग कहा गया है। इस्लाम अमन, चैन व भाईचारा का मजहब हिन्दू-मुस्लिम एकता या कहें कि इस्लाम के सही उसूलों को उन्होंने जाहिर किया जिसके मुताबिक इस्लाम अमन, चैन व भाईचारे का मजहब है। उन्होंने वतनपरस्ती को मज़हब का लाज़मी हिस्सा बताया। इससे पहले सुबह के वक़्त में योग ट्रेनर व स्वदेशी प्रचारक बाबा लेखूराम के ज़रिये काम योग कैंप का हुआ।

 

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