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ईरानी महिला की मदद करने में सुषमा स्वराज ने ज़ाहिर की असमर्थता

नई दिल्ली : ईरानी महिला जिसका केस उड़ीसा के लोकल कोर्ट में चल रहा है उसकी मदद करने में सुषमा स्वराज ने असमर्थता ज़ाहिर की है | कोर्ट ने महिला को 3 लाख रुपए का जुर्माने के साथ एक साल की सजा सुनाई है | सुप्रीम कोर्ट में महिला द्वारा दायर की गयी याचिका पर भी फ़िलहाल कोई कार्यवाही नहीं हुई है|

ईरान में जन्मी इस महिला का नाम नरगिस आसत्री है और इनके पास ब्रिटेन की नागरिकता है| नर्गिस को कामगारों वाला वीजा दिया गया था क्यूंकि वह पासपोर्ट केंसिल हो जाने की वजह से भारत में फंस गई थीं| उड़ीसा के ही एक एनजीओ ASSIST की मदद से यह वीज़ा दिलवाया गया था |

नरगिस परीशन फाउंडेशन के एक एनजीओ से जुड़ी हुई हैं| नरगिस ने 2011 में परीशन नाम से अपनी एनजीओ खोल ली थी| वहां वह अनाथ लड़के-लड़कियों के साथ-साथ गांव के बाकी बच्चों को पढ़ाने लिखाने का काम कर रही थी| 2014 में बच्चों की फील्ड ट्रिप के दौरान एक नेत्रहीन बच्चे की नदी में गिरने से मौत हो गयी | लेकिन  पैसे के लालच में बच्चे के घरवालों ने नरगिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी| नरगिस पर परिवार ने आरोप लगाया कि उसने बच्चे को पानी में फेंका था | माना जाता है कि परिवार ने ASSIST के दबाव में शिकायत दर्ज करवाई थी|
सुषमा स्वराज ने लिखा कि मुझे उड़ीसा सरकार से रिपोर्ट मिल गई है। यह मामला न्यायिक जांच के अंदर है। इस वजह से मैं कोई मदद नहीं कर सकती |शुक्रवार को सुषमा ने रिपोर्ट मांगी थी लेकिन  पूरी रिपोर्ट को देखने के बाद उन्होंने मदद से इंकार कर दिया | ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने हाल ही में कहा है कि उन्हें रिहा कराने के लिए ईरान अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करेगा|

 

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