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ईरानी सरकार ने “अहले सुन्नत” की मस्जिद कराई बंद, बा जमाअत नमाज़ पढ़ने पर भी प्रतिबन्ध

मशहद: ईरानी सरकार ने अहले सुन्नत वाल जमात मसलक के साथ बरती जाने वाली बदले नीति के तहत मशहद शहर में स्थापित अहले सुन्नत की इकलौती मस्जिद बंद कर दी है, जिससे स्थानीय आबादी मस्जिद में बा जमात पांच वक्त नमाज़ और जुमा की नमाज से वंचित हो गए हैं ।

अल अरबिया के अनुसार मशहद शहर के अहले सुन्नत मसलक के आलिम मोहम्मद इब्राहीम कनानी का कहना है कि हाल ही में ईरानी पुलिस ने मशहद शहर में 13 साल पहले किए गए जामा मस्जिद सलमान फारसी पर छापा मारा और मस्जिद की ताला बंदी करके स्थानीय नागरिकों को नमाज़ से वंचित कर दिया।

अल्लामा कनानी का कहना है कि मशहद के जिस इलाके में मस्जिद निर्माण की गई थी वहां सुन्नी मसलक  से संबंधित 400 परिवार रहते हैं और यह आबादी की एकमात्र मस्जिद थी जिसे बंद कर दिया गया।

ईरानी सुन्नी आलिम का कहना था कि सरकार देश में मस्जिदों की निर्माण पर न केवल प्रतिबंध आयद किए हुए है बल्कि अहले सुन्नत मसलक से ताल्लुक रखनेवाला मुसलमानों को नमाज़ के लिए कोई जगह आवंटित करने की अनुमति नहीं है। सरकारी स्तर पर अहले सुन्नत मसलक के मुसलमानों के म्स्ल्की मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। यहां तक कि उन्हें बा जमात नमाज़ अदा करने की भी अनुमति नहीं है।

अल्लामा कनानी का कहना था कि मशहद में बीस साल पहले ईरानी सरकार ने वहां की सबसे बड़ी जामा मस्जिद शहीद कर दी थी जिसके बाद मुसलमानों को वहाँ नई मस्जिद का निर्माण करने की अनुमति नहीं है। मशहद शहर और उसके आसपास में अहले सुन्नत के 50 हजार लोग बसे हैं जिन्होंने नमाज़ के लिए 50 छोटे हॉल आवंटित कर रखे हैं। उन्हें अलग से मस्जिद बनाने की अनुमति नहीं है।

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