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उज़बेकिस्तान में इस्लामी मज़हबी लिबास पर इम्तिना

मुस्लमानों पर अपनी निगरानी में इज़ाफ़ा करते हुए उज़्बेक हुक्काम ने मज़हबी लिबास बिलख़सूस हिजाब और निक़ाब की ताशकंद के कई बाज़ारों में फ़रोख्त से मना कर दिया है, जो ऐसी फ़रोख्त पर राज़दाराना इम्तिना के पेशे नज़र इक़दाम है, यूरेशिया नेट ने य

मुस्लमानों पर अपनी निगरानी में इज़ाफ़ा करते हुए उज़्बेक हुक्काम ने मज़हबी लिबास बिलख़सूस हिजाब और निक़ाब की ताशकंद के कई बाज़ारों में फ़रोख्त से मना कर दिया है, जो ऐसी फ़रोख्त पर राज़दाराना इम्तिना के पेशे नज़र इक़दाम है, यूरेशिया नेट ने ये इत्तिला दी। ताशकंद की एक ताजिर ख़ातून जो तुर्की और मुत्तहिदा अरब अमीरात से अशीया की दर आमद करती है, इसका कहना है कि इस्लामी कपड़ों की फ़रोख्त पोशीदगी से हो रही है।

मैं इसे घर से फ़रोख्त कर रही हूँ, लेकिन सिर्फ भरोसा मंद ग्राहकों को। कई मार्केटस बिशमोल बड़े चोर सो बाज़ार में ब्यापारियों ने निक़ाबों और दीगर हिजाबों को अपने रेक्स से हटा लिया है। मुक़ामी हुक्काम ने बताया जाता है कि बाअज़ कपड़े क़ुरक़ कर लिए हैं, लेकिन उन्होंने हिजाब पर इम्तिना के ताल्लुक़ से रिपोर्टस की तसदीक़ नहीं की। चोर सो मार्केट में एक ओहदादार ने शनाख़्त मख़फ़ी रखने की शर्त पर इंस्टीट्यूट आफ़ वार ऐंड पीस रिपोर्टिंग को बताया कि इस्लामी लिबास की फ़रोख्त पर इम्तिना आइद है, लेकिन मैं हिजाब की बात नहीं कह सकता हूँ।

एक और मुक़ामी टैक्स ऑफीसर ने भी अपनी शनाख़्त मख्फ़ी रखने की शर्त पर कहा कि हुक्काम इस इम्तिना की तशहीर करना नहीं चाहते हैं। कोई भी इस बारे में खुले तौर पर इज़हार-ए-ख़्याल नहीं करेगा। यही मुआमला हलाल कैफे (रेस्टूरेंटस) का है, जो बंद किए जा चुके हैं।

हिजाब पर इम्तिना के साथ उज़्बेक हुक्काम ने नम निगान ख़ित्ता में 181 मसाजिद के अतराफ़-ओ-अकनाफ़ कैमरे नसब कर दिए हैं। हुक्काम ये देखना चाहते हैं कि नमाज़ के दौरान क्या होता है, अइम्मा क्या कहते हैं और आया नौजवान भी नमाज़ों में शरीक होते हैं।

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