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उत्तरप्रदेश में लोक ए वक़्त के तक़र्रुर पर तनाज़ा

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज हुकूमत उत्तरप्रदेश को हिदायत दी है कि नए लोक ए वक़्त के इंतेख़ाब के तरीका कार को चैलेन्ज करते हुए दाख़िल करदा एक मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त पर जवाबी हलफनामा पेश करे। जस्टिस राकेश तीवारी और जस्टिस मुख़तार अहमद पर मुश्तमिल डीविज़न बेंच ने रियासती चीफ एसटोनिग काउंसिल को हिदायत दी कि आइन्दा समाअत की तारीख के दिन 11 अगस्त को जवाबी हलफनामा दाख़िल करें।

एक दिन क़बल चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रा चूड़ ने इस केस की समात से अलहिदगी इख़तियार करली थी जब कि ऐडवोकेट अनूप बरनवाल ने इस बुनियाद पर चैलेन्ज किया है कि नए लोक लोकायुक्त के इंतिख़ाब के वक़्त लोक ए वक़्त एक्ट के मुताबिक़ चीफ जस्टिस से मुशावरत नहीं की गई । रियासती गवर्नर राम नाविक ने भी इस ख़ुसूस में अखिलेश यादव हुकूमत की जानिब से रवाना फाईल को वापिस भेज दिया है । जिस में हाईकोर्ट के रीटाइरड जज रवींद्र सिंह के तक़र्रुर की सिफ़ारिश की गई थी।

गवर्नर ने हुकूमत से ये तफ़सीलात तलब की है कि आया अपोज़ीशन लीडर और चीफ जस्टिस हाईकोर्ट से कोई मुशावरत की गई है। जब कि उत्तरप्रदेश लोक लोकायुक्त एक्ट के दफ़ा 3 के मुताबिक़ लोक ए वक़्त के इंतेख़ाब पर चीफ जस्टिस और अपोज़िशन लीडर से मुशावरत लाज़िमी है।

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