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उत्तराखंड: तेज बारिश का खतरा

देहरादून, 2 जूलाई: उत्तराखंड में आई कुदरती आफत को 16 दिन गुज़र चुके हैं। लेकिन अब भी ये तस्वीर साफ नहीं हो पाई है कि आखिर इस सानेहा में कितने चिराग बुझ गए। दर्द के उस मंजर को लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि महकम मौसमियात की ओर से फिर से इंत

देहरादून, 2 जूलाई: उत्तराखंड में आई कुदरती आफत को 16 दिन गुज़र चुके हैं। लेकिन अब भी ये तस्वीर साफ नहीं हो पाई है कि आखिर इस सानेहा में कितने चिराग बुझ गए। दर्द के उस मंजर को लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि महकम मौसमियात की ओर से फिर से इंतेबाह दे दिया गया है।

उम्मीद है इस बार रियासती हुकूमत पिछली मर्तबा की तरह इस वार्निंग को अनसुनी नहीं करेगी। महकमा ने वार्निग दी है कि 4-7 जुलाई के बीच उत्तराखंड में भारी बारिश हो सकती है।

दूसरी तरफ, मुतास्सिर इलाके में राहत के काम को तेज करने में इंतेज़ामिया के पसीने छूटने लगे हैं। टूटी सड़कें इस राह में बड़ी अड़चन साबित हो रहे हैं। हालांकि हेलीकाप्टर की मदद से गावों में राहत के सामान पहुंचाए जा रहे है, लेकिन यह गिने-चुने इलाकों तक ही महदूद है।

दूर इलाके के गांवों के लिए हालात और खराब होते जा रहे हैं। बदरीनाथ में बचाव मुहिम जारी रही। इतवार को यात्रियों की तादाद सिर्फ 300 बता रहे इंतेज़ामिया के मुताबिक पीर के दिन बदरीनाथ से कुल 1041 यात्री निकाले गए। इंतेज़ामिया की मानें तो अभी बदरीनाथ से तकरीबन 150 लोगों को निकाला जाना बाकी है।

गौरतलब है कि 16-17 जून को उत्तराखंड में आई तबाही में हजारों लोगों की जान चली गई थी। कई गांव और घर तबाह हो गए थे। इंतेज़ामिया से मिले आंकड़ों के मुताबिक अब भी कई हजार लोग लापता हैं। इसलिए ये कहना मुश्किल हो रहा है कि आखिर इस तबाही में कितने मारे गए हैं।

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